कंप्यूटर स्मृति (Computer Memory) – 7

Computer Memory

Table of Contents

कंप्यूटर स्मृति (Computer Memory)

  • डाटा एवं प्रोग्रामों को कंप्यूटर के अन्दर स्टोर करने के लिए Memory की आवश्यकता होती है। यह Memory कुछ समय के लिए या स्थायी रूप से स्टोर करने के लिए हो सकती है।
  • यदि कंप्यूटर में Memory न हो तो डाटा तथा निर्देश तुरंत ही नष्ट हो जायेंगें।
  • वह Memory जो CPU से प्रत्यक्ष रूप से संपर्क स्थापित करती है, मुख्य मेमोरी (Main Memory) कहलाती है तथा जो बैकअप संग्रहण (Backup Storage) में प्रयोग होती है सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) कहलाती है।

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कंप्यूटर स्मृति (Computer Memory) के प्रकार :-

  • (i) प्राथमिक स्मृति (Primary Memory)
  • (ii) द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory)
  • (iii) कैश मेमोरी (Cache Memory)

(i) प्राथमिक स्मृति (Primary Memory)

  • प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) को मुख्य मेमोरी (Main Memory) भी कहते हैं।
  • प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) वोलेटाइल मेमोरी होती है।
  • जब तक सिस्टम में पॉवर (Current) रहता है तब तक प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) डाटा को स्क्रीन पर दिखाती रहती है।
  • प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) काफी खर्चीली एवं सीमित स्टोरेज क्षमता वाली मेमोरी है।

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(ii) द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory)

  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है।
  • जब सिस्टम में पॉवर बंद हो जाती है तब भी द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) डाटा और निर्देशों को स्टोर रखता है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) डाटा को स्थायी रूप से स्टोर रखता है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) सस्ती होती है और ज्यादा मात्रा में डाटा को स्टोर करता है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) के डाटा को ट्रांसफर भी कर सकते हैं।

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(iii) कैश मेमोरी (Cache Memory)

  • कैश मेमोरी (Cache Memory) CPU एवं मुख्य मेमोरी के बीच Buffer की तरह काम करता है।
  • कैश मेमोरी (Cache Memory) किसी प्रोग्राम के डाटा और निर्देश के उन हिस्सों को पकड़ता है जिन्हें CPU बार – बार प्रयोग करता है। जिससे सिस्टम की गति बढ़ जाती है।
  • डाटा एवं निर्देशों के प्रमुख भागों को डिस्क से ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा कैश मेमोरी (Cache Memory) तक पहुँचाया जाता है।
  • कैश मेमोरी (Cache Memory) से डाटा CPU तक पहुँच जाता है।

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Cache Memory के गुण :-

  • Cache Memory तीव्र गति का Static RAM होता है जो एक प्रमुख सेमीकंडक्टर मेमोरी है।
  • Cache Memory की क्षमता मुख्य मेमोरी का 2%-3% होता है।
  • Cache Memory दिए गए निर्देशों एवं डाटा को बहुत कम समय के लिए स्टोर करता है।
  • Cache Memory में बहुत कम क्षमता होती है और यह खर्चीला भी होता है।
  • Cache Memory का एक्सेस टाइम लगभग 10ns (नैनों सेकेंड) होता है।

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प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) और द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) में अंतर –

प्राथमिक स्मृति (Primary Memory)द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory)
(i) यह अस्थायी स्टोरेज है।(i) यह स्थायी स्टोरेज है।
(ii) इसमें RAM सीमित होता है।(ii) द्वितीयक मेमोरी अनंत होती है।
(iii) इस मेमोरी को CPU से RAM तक पहुँचने में पेंटा सेकंड समय लगता है।(iii) CPU द्वितीयक मेमोरी तक पहुँचने में अधिक समय लेता है
(iv) प्राथमिक मेमोरी, द्वितीयक मेमोरी से महँगी होती है।(iv) द्वितीयक मेमोरी, प्राथमिक मेमोरी से सस्ती होती है।
प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) और द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) में अंतर

प्राथमिक मेमोरी के प्रकार :-

  • (i) RAM (Random Access Memory)
  • (ii) ROM (Read Only Memory)

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(i) रैंडम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory) – RAM

  • RAM एक वोलेटाइल मेमोरी है।
  • RAM अल्पकाल तक डाटा को स्टोर करता है ताकि यह डाटा प्रोसेसर तक पहुँच सके।
  • RAM रीड एंड राईट मेमोरी होती है।
  • RAM में डाटा तब तक स्टोर रहता है जब तक इसमें पॉवर सप्लाई होती रहती है।
  • RAM का प्रयोग इनपुट डाटा, आउटपुट डाटा एवं मध्यवर्ती परिणाम को स्टोर करने में किया जाता है।

RAM के प्रकार :-

(i) स्टैटिक रैम (Static RAM or SRAM) :-

  • SRAM अस्थाई मेमोरी है।
  • SRAM में डाटा को रखने के लिए रीजेनरेटर की आवश्यकता नही पड़ती है।
  • SRAM में जब तक पॉवर सप्लाई रहती है डाटा बना रहता है।
  • SRAM सूचनाओं को Flip-Flops तरीके से रखता है।
  • SRAM की गति तीव्र होती है इसलिए Cache Memory के रूप में इसका प्रयोग होता है।
  • SRAM चिप 6 ट्रांजिस्टर एवं कैपेसिटर के आभाव में मैट्रिक्सका निर्माण करता है।
  • SRAM ज्यादा महँगा होता है और बिजली भी ज्यादा खाता है।
  • SRAM की गति DRAM से अधिक होती है।

(ii) डाइनैमिक रैम (Dynamic RAM or DRAM) :-

  • DRAM अति सामान्य प्रकार की मेमोरी है।
  • DRAM का प्रयोग PC में किया जाता है।
  • DRAM कई मिलियन सेल से बनी होती है।
  • DRAM कई ट्रांजिस्टर एवं कैपेसिटर से मिलकर बनी होती है।
  • DRAM में प्रत्येक सेल बिट (Bit) ‘0’ या ‘1’ के रूप में स्टोर करती है।
  • DRAM में कैपेसिटर में ऊर्जा बहुत तेजी से बहती है।
  • DRAM आवेश को एक सेकेण्ड तक के हिस्से को अपने पास रखता है इसलिए DRAM को लगातार रेफ्रेस करना चाहिए , जिससे डाटा का नया रूप स्टोर हो सके।
  • DRAM का प्रयोग अधिकतर कंप्यूटर की मेमोरी के रूप में होता है।
  • DRAM सस्ता एवं छोटा होता है।
  • DRAM में SRAM की तुलना में ताप कम होता है।
  • DRAM का प्रयोग Main Memory बनाने में होता है।

DRAM के प्रकार :-

(a) एक्सटेंडेड डाटा आउटपुट DRAM (Extended Data Output DRAM) – EDODRAM

  • EDODRAM का उपयोग मेमोरी से कंटेंट को पढ़ने की गति को बढ़ाने के लिए होता है।
  • EDODRAM का उपयोग कंटेंट तक पहुँचाने का तरीका सरल करने में भी होता है।

(b) सिंक्रोनस DRAM (Synchronous DRAM) – SDRAM

  • SDRAM का प्रयोग मेमोरी तक ज्यादा तेज पहुँच बनाने में होता है।
  • SDRAM माइक्रोप्रोसेसर के घड़ी की गति से खुद को Synchronise में प्रयोग होता है।

(c) इंहेन्सड SDRAM (Enhanced SDRAM) – ESDRAM

  • ESDRAM का ज्यादातर उपयोग नहीं होता है।
  • ESDRAM में एक छोटा SRAM कैश (Cache) रहता है।
  • ESDRAM डाटा की पहुँच में होने वाली देरी को कम करता है।
  • ESDRAM Operations की गति को बढ़ाता है।

(d) डबल डाटा रेट SDRAM (Double Data Rate SDRAM) – DDRSDRAM

  • DDRSDRAM डाटा को क्लॉक के दोनों किनारों से ट्रान्सफर करता है।
  • DDRSDRAM डबल डाटा ट्रान्सफर में बदलता है।
  • DDRSDRAM 128 MB से 1 GB की क्षमता के होते हैं।

(e) रैमबस DRAM (Rambus DRAM) – RDRAM

  • RDRAM सर्वश्रेष्ठ गति का सेमी कंडक्टर मेमोरी है।
  • RDRAM आपस में विशेष बस इंटरफ़ेस द्वारा जुड़े होते हैं।

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(ii) रीड ओनली मेमोरी (Read Only Memory) – ROM

  • ROM एक स्थाई मेमोरी है।
  • ROM में जो सूचना होती है वह बिजली जाने के बाद भी नष्ट नहीं होती है।
  • ROM का उपयोग सूचना को लंबे समय तक स्टोर करने में किया जाता है।
  • ROM कंप्यूटर में बहुत कम मात्रा में होता है।
  • ROM में अत्यंत आवश्यक प्रोग्राम स्टोर होते है। जैसे – Basic Input / Output System – BIOS ।
  • ROM का उपयोग कंप्यूटर को ऑन करने के बाद बूट (Boot Up) करने के दौरान होता है।
  • जब ROM को अपडेट करना होता है तो नए ROM Chip को पुरानी Chip के स्थान पर लगाते हैं।
  • आज के समय में प्रोग्रामिंग योग्य ROM भी आने लगी हैं।
  • Rewritable ROM Chip के उदाहरण – PROM, EPROM or EEPROM ।

(a) प्रोग्रामेबल ROM (Programmable ROM) – PROM

  • PROM एक प्रोग्रामेबल ROM है।
  • PROM पर सिर्फ एक बार ही लिखा जा सकता है।
  • प्रोग्रामिंग के लिए, PROM प्रोग्रामर का उपयोग होता है।
  • PROM प्रोग्रामर से, यूजर अपनी सूचना को PROM में डालता है।

(b) इरेजेबल प्रोग्रामेबल ROM (Erasable Programmable Read-only Memory) – EPROM

  • EPROM, ROM का एक प्रकार है जिसे मिटाकर फिर से प्रोग्राम किया जा सकता है।
  • EPROM स्टोर डाटा को तीव्र Ultra Violet Wave (पराबैगनी किरण) में करीब 40 मिनट में रखकर मिटाया जाता है।
  • PROM की तुलना में EPROM अच्छी है क्योकि इसका पुनः उपयोग संभव है।

(c) इलेक्ट्रिकली इरेजेबल PROM (Electrically Erasable Programmable Read-only Memory) – EEPROM

  • EEPROM का डाटा बिजली द्वारा मिटाया जाता है।
  • EEPROM में चिप का एक – एक बाइट (Byte) करके डाटा मिटाकर फिर से प्रोग्रामिंग किया जा सकता है।
  • EEPROM में थोडा या पूरा डाटा बिजली द्वारा मिटाया जा सकता है।
  • EEPROM को कंप्यूटर से हटाने की जरूरत नही होती है।
  • EEPROM को 10,000 बार पुनः प्रोग्रामिंग किया जा सकता है।
  • EEPROM में डाटा को मिटने की प्रकिया में 4 से 10 ms (मिलीसेकेण्ड) का समय लगता है।
  • EEPROM में पुनः लिखने की प्रक्रिया को फ्लैशिंग (Flashing) कहते हैं।

(d) फ्लैश मेमोरी (Flash Memory)

  • Flash Memory, EEPROM का ही एक प्रकार है।
  • Flash Memory में कंप्यूटर कण्ट्रोल द्वारा कॉन्टेंट को मिटाया जा सकता है।
  • Flash Memory का उपयोग बैटरी से चलने वाली डिजिटल डिवाइस में होता हैं । जैसे :- हेंड हेल्ड कंप्यूटर (Hand Held Computer), डिजिटल कैमरा (Digital Camera), मोबाइल फ़ोन (Mobile Phone), म्यूजिक प्लेयर (Music Players) आदि।

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द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory / External Memory /Auxiliary Storage)

  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) से सम्बंधित डाटा और निर्देशों को तब भी उपयोग कर सकते हो जब आप प्रोसेसिंग न कर रहे हो।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory), मुख्य मेमोरी से इसलिए अलग है क्योकिं द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) का सम्बन्ध CPU से सीधे नहीं होता।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory), सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस में डाटा एवं सूचनाओं को स्टोर करता है।
  • कंप्यूटर के स्विच ऑफ़ होने पर भी द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) में डाटा एवं सूचनाओं को स्टोर रखता है।

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द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) की विशेषताएँ

  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) चुम्बकीय (Magnetic) एवं प्रकाशीय (Optical) Memory होती हैं।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) स्थाई मेमोरी होती है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) को बैकअप मेमोरी भी कहते हैं।
  • कंप्यूटर के स्विच ऑफ़ होने पर भी द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) में डाटा स्टोर रहता होता है।
  • कंप्यूटर द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) के बिना भी काम कर सकता है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory), मुख्य मेमोरी से धीमी (Slow) होती है।
  • द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) के कुछ उदाहरण :- हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, मेमोरी डिस्क, सी०डी०, डी०वी०डी०, ब्लू रे डिस्क, पेन/फ़्लैश ड्राइव आदि।

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हार्ड डिस्क (Hard Disk)

  • हार्ड डिस्क (Hard Disk), विशेष मैग्नेटिक डिस्क होते हैं।
  • मैग्नेटिक डिस्क सरफेश डिवाइस (Surface Device) होती है।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk) सरफेश में डाटा स्टोर करता है।
  • एक सिंगल हार्ड डिस्क (Hard Disk) में कई प्लेटर्स (Platters) होते हैं, जो चुम्बकीय रिकॉर्डिंग माध्यम से ढँके होते हैं।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk) का सरफेश कई Circular Concentric Tracks (संकेद्रित वृत्तिय पथों) में डिवाइड होता है।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk) में प्रत्येक पथ (Tracks) सेक्टर्स (Sectors) में डिवाइड होता है।
  • सभी पथों में सेक्टरों की संख्या समान होती है।
  • सभी पथ समान मात्रा में डाटा को स्टोर करते हैं।
  • Inner Tracks में बिट सघनता, Outer Tracks से अधिक होती है।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk) तथा रीड/राइट हेड (Read/Write Head) को एक वस्तु में बंद रखा जाता है। इस तकनीक को विनचेस्टर तकनीक (Winchester Technique) कहते हैं।
  • स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने के लिए कई हार्ड डिस्क (Hard Disk) के प्लेटर्स को कॉमन ड्राइव में रखा जाता है।
  • जब कंप्यूटर को ऑन किया जाता है तब हार्ड डिस्क (Hard Disk) डाटा स्टोर करने हेतु या सूचना देने के लिए उपलब्ध हो जाता है।
  • हार्ड डिस्क (Hard Disk) में निर्देश, डाटा, ऑपरेटिंग सिस्टम, कम्पाइलर्स, एसेम्बलर्स, एप्लीकेशन प्रोग्राम, डाटाबेस आदि को स्टोर किया जाता है।

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फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

  • एक फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) प्लास्टिक की बनी होती है। फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) की ऊपरी सतह पर चुम्बकीय लेप होता है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) आकार में गोल होती है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) बहुत सस्ती होती है और अन्य द्वितीयक स्टोरेज डिवाइस से धीमी गति वाली होती हैं।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का ख्याल रखना पड़ता है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) मुड़ने पर, अत्यधिक ताप पर, धुल आदि के संपर्क में आने पर फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का डाटा नष्ट हो सकता है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का उपयोग आजकल नाममात्र का किया जाता है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का उपयोग फ्लॉपी डिस्क ड्राइव में होता है जिसका नाम “A” या “B” ड्राइव रखा जाता है।
  • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) निम्न आकार की हो सकती हैं :-
    • (i) 8 इंच :- यह पतली फ्लॉपी डिस्क है, जिसका अविष्कार IBM ने सन् 1960 में किया गया था।
    • यह फ्लॉपी डिस्क पहले रीड ओनली रूप में था, बाद में इसे रीड/राइट रूप में बनाया गया।
    • (ii) 5 1/4 इंच :- यह फ्लॉपी डिस्क लगभग 1.2 MB डाटा स्टोर कर सकने में सक्षम थी।
    • (iii) 3 1/2 इंच :- यह फ्लॉपी डिस्क लगभग 1.44 MB डाटा स्टोर कर सकने में सक्षम थी।

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मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes)

  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) का उपयोग बैकअप मेमोरी के रूप में होता है।
  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) Sequential Access Devices होती हैं।
  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) लचीले पॉलीस्टर के बने होते हैं तथा उसके ऊपर चुम्बकीय पदार्थ का लेप होता है।
  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) की लम्बाई 3mm से 12.7mm तक होती है।
  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) कैसेट, रील एवं कार्टिज के रूप में उपलब्ध है।
  • मिनी कंप्यूटर के साथ उपयोग किया जाने वाला रील अन्दर से 1/2 इंच एवं 2400 फीट लम्बा होता है।
  • मैग्नेटिक टेप्स (Magnetic Tapes) प्रति इंच 1600 कैरेक्टर को स्टोर कर सकता है।

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ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)

  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) का सम्बन्ध डाटा का प्रकाशीय तरीके से पढ़े जाने योग्य माध्यम, स्टोर करना है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) में डाटा स्टोर, एक खास पैटर्न पर मार्क बनाकर, लेज़र प्रकाश की एक बीम को स्पिनिंग डिस्क को फोकस करके होता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) का उपयोग बैकअप मेमोरी के लिए होता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) की क्षमता 650MB से 17GB तक होती है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) एक डायरेक्ट एक्सेस डिवाइस है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) का उपयोग संगीत, वीडियो, या अन्य कोई भी डाटा स्टोर करने में होता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) का रीड / राइट हेड, डिस्क तल को छूता नहीं है, जिससे यह घिसता नही है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk), सूचना को पिट्स एवं लैंड्स के रूप में स्टोर करता है।
  • पिट्स, छोटे एवं रिफ्लेक्टिव उभार के होते हैं, जो लेज़र बीम द्वारा निर्मित होते हैं तथा लैंड्स सपाट तल होते हैं।
  • लैंड्स, लेज़र प्रकाश को परावर्तित कर देता है और इसमें बाइनरी अंक “1” पढ़ा जाता है।
  • पिट, प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और बाइनरी अंक “0” पढ़ा जाता है।
  • ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) के प्रकार :-
    • CD-ROM
    • CD-R
    • CD-RW
    • DVD-ROM
    • Blu-Ray Disk

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कॉम्पैक्ट डिस्क रोम (Compact Disk ROM) CD-ROM

  • ऐसे CDs जो कंप्यूटर डाटा को स्टोर करते हैं, CD-ROM कहे जाते हैं।
  • CD-ROM एक ऑप्टिकल डिस्क है। जिसमें, लेज़र तकनीक द्वारा डिस्क के ऊपर डाटा को लिखना और पढ़ा जाना संभव होता है।
  • CD-ROM सिर्फ रीड ओनली डिस्क है। मतलब इसे न ही मिटाया और न ही पुनर्लेख किया जा सकता है।
  • CD-ROM का प्रयोग पोर्टेबल तरीके से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में किया जा सकता है।
  • CD-ROM की क्षमता 650MB होती है, जो फ्लॉपी डिस्क से 700 गुना ज्यादा है और लगभग 3 लाख टेक्स्ट पेज स्टोर कर सकता है।

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कॉम्पैक्ट डिस्क रिकॉर्डेबल (Compact Disk Recordable) CD-R

  • CD-R एक खाली डिस्क होती है, जिसका उपयोग सूचना स्टोर करने के लिए होता है।
  • CD-R का प्रयोग तब किया जाता है जब एक सेट डाटा की जरूरत होती है।
  • CD-R में एक बार सूचना लिख जाने के बाद बदल नहीं सकते।
  • CD-R, Write Once Read Many Time होती है।
  • CD-R में लिखा डाटा सदैव के लिए स्टोर हो जाता है।
  • CD-R की स्टोरेज क्षमता लगभग 700 MB होती है।
  • ऑप्टिकल डिस्क में डाटा को लिखने की प्रक्रिया को बर्निंग (Burning) कहते हैं।
  • किसी भी CD-ROM ड्राइव में CD-R का उपयोग कर सकते हैं।

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कॉम्पैक्ट डिस्क रीराइटेबुल (Compact Disc-Rewritable) CD – RW

  • CD – RW एक रीड / राइट ऑप्टिकल डिस्क है।
  • यूजर CD – RW में रिकॉर्ड किये हुए डाटा को मिटा सकता है और नया डाटा लिख सकता है।
  • CD – RW में लेप के रूप में ऑर्गेनिक डाई के स्थान पर चाँदी, इंडियन, एंटीमनी एवं टेल्यूरीयम का मिश्रण होता है।
  • CD – RW में डाटा लिखने के लिए CD – RW ड्राइव का प्रयोग होता है।
  • CD – RW, CD-ROM एवं CD-R को भी पढ़ने में सक्षम है।
  • CD – RW का प्रयोग बैकअप के लिए होता है।

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डिजिटल वर्सेटाइल / वीडियो डिस्क (Digital Versatile / Video Disk) – DVD

  • DVD में CD से ज्यादा स्टोरेज क्षमता होती है।
  • DVD में CD की तुलना में लेज़र बीम की शोर्टर तरंगदैर्ध्य का प्रयोग होता है।
  • DVD की स्टोरेज क्षमता की रेंज 4.7 GB से 17 GB तक होती है।
  • एक स्टैण्डर्ड DVD एक CD से 7 गुना अधिक डाटा स्टोर करता है।
  • DVD की डाटा ट्रांसफर दर 10 MBPS होती है।
  • DVD का उपयोग :- डेटाबेस, फिल्मों, संगीत, जटिल सॉफ्टवेयर आदि स्टोर करने के लिए होता है।
  • DVD तीन प्रकार की होती हैं :-
    • (i) DVD-ROM (DVD-Read Only Memory)
    • (ii) DVD-R (DVD-Recordable)
    • (iii) DVD-RW (DVD-Re Writable)

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ब्लू रे डिस्क (Blu Ray Disk)

Computer Memory, Blu Ray Disk
Computer Memory
Blu Ray Disk
  • Blu Ray Disk एक ऑप्टिकल डिस्क फॉर्मेट है।
  • Blu Ray Disk कंप्यूटर डाटा, हाई डेफिनिशन वीडियो (High Definition Video) एवं डिजिटल विडियो को रिकॉर्ड स्टोर एवं प्ले बैक कर सकता है।
  • Blu Ray Disk में DVD से तेज गति से डाटा ट्रांसफर होता है।
  • Blu Ray Disk की डाटा ट्रांसफर दर 36 MBPS होती है।
  • Blu Ray Disk, डेढ़ घंटे में ही 25 GB डाटा को रिकॉर्ड कर करता है।
  • सिंगल लेयर Blu Ray Disk 27 GB डाटा स्टोर कर सकता है।
  • डबल लेयर Blu Ray Disk 50 GB डाटा स्टोर कर सकता है।

Computer Memory

सॉलिड स्टेट ड्राइव्स (Solid State Drives) – SSD

Computer Memory, SSD
Computer Memory, SSD
  • SSD, इलेक्ट्रिक तरीके से मिटाने योग्य एवं प्रोग्राम किये जाने योग्य डाटा को स्थायी रूप से स्टोर करता है।
  • SSD, One Transistor Memory Cell का उपयोग करता है।
  • SSD उच्च विश्वसनीयता, कम उर्जा खर्च एवं कम खर्च वाले सेमीकंडक्टर मेमोरी डिवाइस की तरह होती हैं।

Computer Memory

यू०एस०बी० फ़्लैश ड्राइव / पेन ड्राइव / थंब ड्राइव (USB Flash Drive / Pen Drive / Thumb Drive)

Computer Memory, Pen Drive
Computer Memory
Pen Drive
  • Pen Drive एक पोर्टेबल यूनिवर्सल सीरियल बस (Universal Serial Bus) – USB फ़्लैश मेमोरी डिवाइस है।
  • Pen Drive ध्वनि, विडियो एवं डाटा फाइल को कंप्यूटर में स्टोर करने के लिए या ट्रांसफर करने के लिए उपयोग में आती है।
  • Pen Drive साधारणत: 1 GB, 2 GB, 4 GB, 8 GB, 16 GB, 32 GB, 64 GB आदि की रेंज में आती हैं।
  • Pen Drive, कंप्यूटर से बिजली को बाहरी USB कनेक्शन द्वारा प्राप्त करते हैं।

Computer Memory

फ़्लैश मेमोरी कार्ड या स्मृति कार्ड (Flash Memory Card or Storage Card)

Computer Memory, SD Card
Computer Memory
SD Card
  • Flash Memory Card ठोस अवस्था का इलेक्ट्रॉनिक फ़्लैश मेमोरी कार्ड है जो डाटा स्टोर करने वाला डिवाइस है।
  • Flash Memory Card का उपयोग :- डिजिटल कैमरा, हैण्ड हेल्ड डिवाइस, मोबाइल, कंप्यूटर , म्यूजिक प्लेयर्स, विडियो गेम आदि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में होता है।
  • Flash Memory Card एक आसान, तेज एवं विश्वसनीय तरीका है जो डिजिटल फाइलों को स्टोर व ट्रांसफर करने में उपयोग होता हैं।
  • प्रत्येक Flash Memory Card, Flash Memory Technique पर आधारित होता है।
  • Flash Memory Card को कंप्यूटर से कनेक्ट करके या USB Card रीडर द्वारा पढ़ा जा सकता है।

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मेमोरी स्टिक कार्ड (Memory Stick Card)

  • Memory Stick Card एक मेमोरी कार्ड है जो Sony और Sandisk कंपनी द्वारा बनाया गया है।
  • डाटा को स्टोर करने एवं ट्रांसफर करने में Memory Stick Card का उपयोग होता है।
  • Memory Stick Card की स्टोरेज क्षमता 4 MB से 56 MB तक होती है।

Computer Memory

Memory के बारे में कुछ तथ्य

  • Computer में सर्वोच्च स्थान पर रजिस्टर (प्रोसेसर के सबसे अधिक पास) स्थित होता है।
  • रजिस्टर के बाद Cache Memory का स्थान आता है।
  • सबसे अंत में Primary Memory का स्थान आता है, जिसे DRAM कहते हैं।
  • रजिस्टर, कैश मेमोरी, तथा DRAM सभी Internal Memory के भाग हैं।
  • मेमोरी के इकाई में जैसे – जैसे हम नीचे की ओर जाते हैं बिट घटता है, कैपीसिटी बढ़ती है एवं एक्सेस टाइम घटता है।
  • जब मेमोरी यूनिट में डाटा ट्रांसफर होता है तो इसकी दर को डाटा ट्रांसफर दर या डाटा हस्तांतर दर कहते हैं।

Computer Memory

मेमोरी में डाटा का निर्दिष्टिकरण (Data Representation in Memory)

  • RAM, ROM फ्लॉपी डिस्क या हार्ड डिस्क का उपयोग करते हैं तो डाटा को इकाई में मापते हैं।
  • Computer शब्दावली में Memory Capacity को बाइट (Byte) में व्यक्त किया जाता है।
  • चार बिट (Bit) मिलकर एक निब्बल (Nibble) बनाते हैं।
  • 2 निब्बल (Nibble) मिलकर एक बाइट (Byte) बनाते हैं।
  • बिट (Bit) मेमोरी की सबसे छोटी इकाई है।
  • एक बिट, एक डिजिट के बराबर होता है – 0 या 1
  • 0 या 1 को बाइनरी डिजिट (Binary Digits) या बिट (Bit) कहा जाता है।
  • 8 बिट मिलकर 1 बाइट बनता है।
  • कंप्यूटर में प्रविष्टि के रूप में प्रत्येक अक्षर, चिन्ह या संकेत एक बाइट के बराबर ममोरी का उपयोग करता है।
1 Nibble4 Bits
8 बिट1 बाइट या 2 निबल
1024 बाइट1 किलोबाइट (KB)
1024 KB1 मेगाबाइट (MB)
1024 MB1 गीगाबाइट (GB)
1024 GB1 टेराबाइट (TB)
1024 TB1 पेंटाबाइट (PB)
1024 PB1 एक्जाबाइट (EB)
1024 EB1 जेटाबाइट (ZB)
1024 ZB1 योटाबाइट (YB)

Computer Memory

Memory का एक्सेस टाइम एवं स्टोरेज क्षमता

मेमोरीस्टोरेज क्षमताएक्सेस टाइम
Register200 बाइट1 – 2 ns (नैनो सेकेंड)
Cache Memory32 KB – 4 MB3 – 10 ns
RAM16 MB – 4 GB10 – 16 ns
Magnetic Disk160 GB – 1600 GB10 – 50 ms
Optical Disk700 MB – 60 GB100 – 200 ms

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