कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) – 9

Computer Software

Table of Contents

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software)

  • कंप्यूटर में प्रोग्रामों एवं प्रक्रियाओं का संग्रह, जो कंप्यूटर में काम करने में सहायता करता है कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) कहलाता है।
  • किसी भी कंप्यूटर हार्डवेयर के समुचित कार्य करने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) जिम्मेदार होता है।
  • बिना सॉफ्टवेयर (Software) के हार्डवेयर का कोई महत्त्व नहीं होता।
  • जब कोई प्रोग्रामर विशिष्ट प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग करते हुए, निर्देशों का समूह लिखता है, इन निर्देशों को सोर्स कोड कहते हैं। इन सोर्स कोडो को कम्पाइलर (Compiler) ऐसी भाषा में बदलता हैं, जिसे कंप्यूटर समझ सके।
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) निम्नलिखित हैं :-

Computer Software

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
    • सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software)
      1. डिवाइस ड्राइवर (Device Driver)
      2. बायोस (BIOS – Basic Input and Output System)
      3. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
    • डेवलपिंग सॉफ्टवेयर (Developing Software)
      1. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language)
      2. ट्रांसलेटर (Translator)
      3. लिंकर (Linker)
      4. लोडर (Loader)
    • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)
      1. डिस्क डिफ्रेग्मेंटर (Disk Defragmenter)
      2. डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner)
      3. डिस्क चेकर (Disk Checker)
      4. बैकअप एवं रिस्टोर (Backup and Restore)
      5. फाइल कम्प्रेशन (File Compression)
      6. डिस्क पार्टीशन (Disk Partitions)
      7. वायरस स्कैनर (Virus Scanner)
      8. क्रिप्टोग्राफिक यूटिलिटीज (Cryptographic Utilities)
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
    • सामान्य उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software)
      1. वर्ड प्रोसेसर (Word Processor)
      2. प्रस्तुति (Presentation)
      3. स्प्रेड शीट (Spread Sheet)
      4. डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System)
      5. ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software)
      6. डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software)
      7. मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software)
    • विशिष्ट उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Special Purpose Application Software)
      1. रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software)
      2. एच० आर० मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (HR Management Software)
      3. बिलिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर (Billing System Software)
      4. रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software)
      5. एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software)
      6. पेरोल सिस्टम (Payroll System)
      7. अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System)
      8. फर्मवेयर (Firmware)
      9. मिडलवेयर (Middleware)

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) के प्रकार

  1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
  2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)

1- सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)

  • वह सॉफ्टवेयर जो सिस्टम की सभी क्रियाओं को कण्ट्रोल में रखता है, सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) कहलाता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) सभी हार्डवेयरों के बीच सम्बन्ध स्थापित करने में मदद करता है।
  • सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) यूजर और कंप्यूटर के बीच इंटरफ़ेस का काम करता है।

क्रियाओं के आधार पर सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :-

  • (i) सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software)
  • (ii) डेवलपिंग सॉफ्टवेयर (Developing Software)
  • (iii) यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

(i) सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software)

  • सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software) कंप्यूटर सिस्टम को नियंत्रित करता हैं एवं सहारा देता है।
  • सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software) डाटा प्रोसेसिंग एप्लीकेशन को भी नियंत्रित करता हैं एवं सहारा देता है।

सिस्टम मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (System Management Software) निम्नलिखित हैं :-

  • (a) डिवाइस ड्राइवर (Device Driver)
  • (b) बायोस (BIOS – Basic Input and Output System)
  • (c) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
(a) डिवाइस ड्राइवर (Device Driver)
  • ऐसे सॉफ्टवेयर जो कंप्यूटर को चलाने के लिए बनाये जाते हैं, डिवाइस ड्राइवर (Device Driver) कहलाते हैं।
  • डिवाइस ड्राइवर (Device Driver) का प्रयोग कंप्यूटर चलाने के लिए किया जाता है।
(b) बायोस (BIOS – Basic Input and Output System)
  • कंप्यूटर के हार्डवेयर को चालू एवं नियंत्रित करने के लिए एक सिस्टम का प्रयोग किया जाता है, जिसमें बायोस (BIOS – Basic Input and Output System) महत्वपूर्ण हैं।
  • BIOS (Basic Input and Output System) कंप्यूटर के ही अन्दर बना होता है, जो इसमें प्रयुक्त होने वाला प्रथम कोड है।
  • BIOS (Basic Input and Output System) ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करने एवं पुनः स्टार्ट करने में काम आता है।
  • कंप्यूटर जैसे ही स्टार्ट होता है, BIOS (Basic Input and Output System) सिस्टम डिवाइस की पहचान करता है।
  • सिस्टम डिवाइस में :- Keyboard, Device Drive, Mouse आदि आते हैं।
  • कंप्यूटर स्टार्ट होते ही पेरीफेरल डिवाइस, हार्डडिस्क में उपस्थित अन्य सॉफ्टवेयर को लोड करके शुरू करता है, जिससे पूरा सिस्टम उस सॉफ्टवेयर के कण्ट्रोल में आ जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को बूटिंग (Booting) कहा जाता है।
  • BIOS (Basic Input and Output System) को ROM के अन्दर स्टोर किया जाता है।
(c) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
  • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) सामान्य रूप से निर्देशों का समूह होता हैं।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) कंप्यूटर से जुड़े सभी उपकरणों को नियंत्रित करता है।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System), एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके यूजर के निर्देशों के आधार पर आउटपुट देता है।
  • कुछ प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) :- MS DOS, Windows, Linux, Unix, Mac OS, Chrome OS, Google Android आदि।
  • Operating System निर्देशों का ऐसा समूह है जो विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर संसाधनों जैसे :- Hardware – Software, Process – Commands, Control – Programme एक्जेक्यूशन को सम्पादित करने में सहायता करता है।
  • जब कंप्यूटर चालू किया जाता है तो पहला Software जो Computer में लोड होता है, उसे Operating System कहते हैं।
  • Computer को शुरू करते समय कंप्यूटर की Memory में Operating System (OS) के लोड होने को बूटिंग (Booting) कहते हैं। 
  • हार्डवेयर Operating System से प्राप्त निर्देशों द्वारा व्यवस्थित होकर आपस में समन्वित होकर दिए गए कार्य को पूरा करते हैं।
  • कंप्यूटर की मेमोरी में Operating System के लोड होने के बाद ही Application Software काम करते हैं।
  • Operating System हार्ड डिस्क से कंप्यूटर की मेमोरी में आ जाता है, जिसका प्रारंभ एक छोटे प्रोग्राम से होता है जिसे बूटस्ट्रैप लोडर (Bootstrap Loader) कहते हैं। यह ROM में फर्मवेयर के रूप में रहता है।

(ii) डेवलपिंग सॉफ्टवेयर (Developing Software)

किसी भी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के पूर्ण विकास एवं अच्छे से काम करने के लिए डेवलपिंग सॉफ्टवेयर (Developing Software) की आवश्यकता होती है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के विकास के लिए निम्नलिखित डेवलपिंग सॉफ्टवेयर (Developing Software) की आवश्यकता होती हैं :-

  • (a) प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language)
  • (b) ट्रांसलेटर (Translator)
  • (c) लिंकर (Linker)
  • (d) लोडर (Loader)
(a) प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language)
  • प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language) स्वयं के नियमों का समूह (Set Of It Self Rules) है जिसमें तार्किक पदों (Logical Steps) को Algorithm द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  • प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language) कंप्यूटर द्वारा की गई गणनाओं को व्यक्त करने में सहायता करती है।
  • आज के समय में अनेक प्रकार की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language) का उपयोग हो रहा है जैसे :- Basic, Fortran, Python, Ronni, Java, Javascript, C, C++, Pascal, Algol, Lisp आदि।
(b) ट्रांसलेटर (Translator)
  • कंप्यूटर को जो भी निर्देश, डाटा या आदेश दिया जाता है उसका मशीनी भाषा में (0, 1 रूप में) होना जरूरी है, क्योकि कंप्यूटर मशीनी भाषा ही समझता है।
  • डाटा, निर्देश या आदेश को मशीनी भाषा में बदलने का काम ट्रांसलेटर (Translator) करता है।

ट्रांसलेटर (Translator) के प्रकार :-

  • (क) एसेम्बलर (Assembler)
  • (ख) कम्पाइलर (Compiler)
  • (ग) इंटरप्रेटर (Interpreter)
(क) एसेम्बलर (Assembler)
  • एसेम्बलर (Assembler) एसेम्बली लैंग्वेज को मशीनी भाषा में बदलता है।
  • एसेम्बली लैंग्वेज कंप्यूटर निर्माताओं द्वारा बनाई जाती है, जो नीमोनिक कोड में होती है, इसे Source Programme कहते हैं।
  • एसेम्बलर (Assembler) आउटपुट के रूप में मशीन लैंग्वेज प्रोग्राम देता है, जिसे Object Program कहते हैं।
(ख) कम्पाइलर (Compiler)
  • यदि कोई Source Program, High Level Language में होता है तो कम्पाइलर (Compiler) इसे मशीनी भाषा में बदल देता है।
  • कम्पाइलर (Compiler) में प्रत्येक High Level Language के लिए एक Assembler होता है।
  • कम्पाइलर (Compiler), यूनिक ऑब्जेक्ट प्रोग्राम बनाता है।
(ग) इंटरप्रेटर (Interpreter)
  • इंटरप्रेटर (Interpreter) प्रत्येक Source Program स्टेटमेंट को मशीनी निर्देशों के क्रम में अनुवाद करता है।
  • इंटरप्रेटर (Interpreter) प्रोग्राम की अपेक्षा कम्पाइलर प्रोग्राम का निस्पादन, कोई भी कंप्यूटर सिस्टम तीव्रता से करता है।
(c) लिंकर (Linker)
  • जब बड़े प्रोग्राम को छोटे – छोटे भागों में विभक्त किया जाता है, प्रोग्रामिंग को सरल बनाने के लिए
  • जब कोडिंग पूरी हो जाती है तो लिंकर (Linker) द्वारा प्रत्येक भाग को जोड़कर एक कड़ी बनाई जाती है, जिससे प्रोग्राम काम करने योग्य बन जाए।
(d) लोडर (Loader)
  • लोडर (Loader) प्रोग्राम स्टोरेज डिवाइस से मुख्य मेमोरी में प्रोग्राम को कॉपी करता है।
  • प्रोग्रामों का उचित स्थान पर काम करना लोडर (Loader) संभव करता है।
  • लोडर (Loader) ROM में किसी प्रोग्राम को स्टोर कर देता है तथा खुद ही प्रोग्राम को मुख्य मेमोरी में ट्रान्सफर करता है।
  • इसमें प्राय: Boot Strap लोडिंग द्वारा लोडर (Loader) के प्रारंभिक कुछ निर्देशों को लोड करते हैं।
कम्पाइलर और इंटरप्रेटर में अंतर (Difference Between Compiler And Interpreter)
कम्पाइलर (Compiler)इंटरप्रेटर (Interpreter)
1- कम्पाइलर (Compiler) पूरे कंप्यूटर प्रोग्राम को मशीन कोड में बदलता है, यदि कोई एरर नहीं होता है।1- इंटरप्रेटर (Interpreter) प्रत्येक लाइन को मशीन कोड में बदलता है, यदि कोई एरर नहीं है।
2- कम्पाइलर (Compiler) डिबगिंग के लिए धीमा हो जाता है।2- इंटरप्रेटर (Interpreter) डिबगिंग के लिए तीव्र होता है।
3- कम्पाइलर (Compiler) का Execution Time कम होता है।3- इंटरप्रेटर (Interpreter) का Execution Time अधिक होता है।
4- कम्पाइलर (Compiler) पूरे प्रोग्राम को अनुवाद करने से पहले स्कैन करता है।4- इंटरप्रेटर (Interpreter) प्रोग्राम के प्रत्येक लाइन का क्रम से अनुवाद करता है।

(iii) यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) System Software का ही एक भाग है।
  • यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) का प्रयोग कंप्यूटर के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर जो इसमें इनस्टॉल रहते हैं के देखरेख के लिए होता है।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) निम्नलिखित कार्यों को करता है :-

  • (a) डिस्क डिफ्रेग्मेंटर (Disk Defragmenter)
  • (b) डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner)
  • (c) डिस्क चेकर (Disk Checker)
  • (d) बैकअप एवं रिस्टोर (Backup and Restore)
  • (e) फाइल कम्प्रेशन (File Compression)
  • (f) डिस्क पार्टीशन (Disk Partitions)
  • (g) वायरस स्कैनर (Virus Scanner)
  • (h) क्रिप्टोग्राफिक यूटिलिटीज (Cryptographic Utilities)
(a) डिस्क डिफ्रेग्मेंटर (Disk Defragmenter)
  • डिस्क डिफ्रेग्मेंटर (Disk Defragmenter) का उपयोग फाइलों को डिस्क के खाली स्थान पर व्यवस्थित करने के लिए होता है।
  • डिस्क डिफ्रेग्मेंटर (Disk Defragmenter) के कारण ही प्रोग्राम अच्छे से गति कर पाता है।
(b) डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner)
  • डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner) का उपयोग हार्ड ड्राइव में खाली स्थान सर्च करने के लिए किया जाता है।
  • इसके साथ ही डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner) फाइल का सूचीकरण – टेम्पररी फाइल, इन्टरनेट कैशफाइल, एवं गैर जरूरी प्रोग्राम फाइल में करता है।
  • डिस्क क्लिनर (Disk Cleaner) के सूचीकरण के कारण ही इन्हें सुरक्षित डिलीट किया जाता सकता है।
(c) डिस्क चेकर (Disk Checker)
  • डिस्क चेकर (Disk Checker) का उपयोग हार्ड डिस्क के सम्पूर्ण कंटेंट को चेक करने के लिए होता है।
  • डिस्क चेकर (Disk Checker) करप्टेड या क्षतिग्रस्त या उचित तरीके से सेव न की गई फाइलों को हार्ड ड्राइव से सर्च करके हटाता है।
  • डिस्क चेकर (Disk Checker) हार्ड ड्राइव को ज्यादा कुशलता से काम करने के लिए तैयार करता है।

(d) बैकअप एवं रिस्टोर (Backup and Restore)

  • बैकअप एवं रिस्टोर (Backup and Restore) का उपयोग हार्ड ड्राइव में स्टोर सूचना की कॉपी बनाने में होता हैं।
  • बैकअप एवं रिस्टोर (Backup and Restore) के द्वारा डिस्क के असफल होने पर डाटा या सूचना को वापस बैकअप के आधार पर काम में लाना संभव होता है।
(e) फाइल कम्प्रेशन (File Compression)
  • फाइल कम्प्रेशन (File Compression) का उपयोग फाइल की साइज़ को कम करने के लिए होता है।
  • फाइल कम्प्रेशन (File Compression) किसी भी फाइल को 50% से 90% कम कर देता है।
  • WinZip और WinRAR आर्काइव फ़ॉर्मेट में फाइल कम्प्रेशन (File Compression) है।
(f) डिस्क पार्टीशन (Disk Partitions)
  • डिस्क पार्टीशन (Disk Partitions) का उपयोग एकल ड्राइव को अन्य ड्राइव में विभक्त करता है।
  • डिस्क पार्टीशन (Disk Partitions) से बनी अन्य ड्राइव के प्रत्येक हिस्से का अपना फाइल सिस्टम होता है।
  • ड्राइव का प्रत्येक हिस्सा अपना एक अलग व्यवहार करता है।
(g) वायरस स्कैनर (Virus Scanner)
  • वायरस स्कैनर (Virus Scanner) का उपयोग कंप्यूटर को वायरस (मालवेयर सॉफ्टवेयर) से सुरक्षा देने में होता है। इसे एंटीवायरस (Antivirus) भी कहते हैं।
  • सामान्य रूप से वायरस (Virus) कंप्यूटर सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जो कंप्यूटर से सिस्टम सॉफ्टवेयर या अन्य महत्वपूर्ण फाइलों को नष्ट करता है या होस्ट को चुरा कर भेजता है।
  • कुछ प्रमुख एंटीवायरस सॉफ्टवेयर हैं – McAfee Security Scan Plus, Norton, Avast, Quick Heal, Kaspersky आदि।
(h) क्रिप्टोग्राफिक यूटिलिटीज (Cryptographic Utilities)
  • क्रिप्टोग्राफिक यूटिलिटीज (Cryptographic Utilities) का उपयोग फाइलों के कोडिंग और डिकोडिंग में होता है।
  • वह प्रक्रिया जो सन्देश या डाटा या कंटेंट को इन्टरनेट पर हैकर्स से छुपाने और बचाने के लिए की जाती है, एनक्रिप्शन (Encryption) कहलाती है।
  • वह प्रक्रिया जो एन्क्रिप्ट किये गए सन्देश या डाटा या कंटेंट को डिकोड करने के लिए प्रयोग होती है, डिक्रिप्शन (Decryption) कहलाती है।
  • डिक्रिप्शन की प्रक्रिया करने के लिए एक पासवर्ड की आवश्यकता होती है।

2- एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)

  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) विशिष्ट कार्यों के लिए कोड किये गए प्रोग्रामों का समूह होता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) यूजर के द्वारा परिभाषित कार्यों को आसानी से पूरा करता है।
  • एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) विशिष्ट रूप से निर्मित तथा उपयोग करने की अवस्था में खरीदे जाते हैं। जैसे :- Accounting Program, Data Base Program, Image Editing Program, Reservation Program आदि।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) दो प्रकार के होते हैं :-

  • (i) सामान्य उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software)
  • (ii) विशिष्ट उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Special Purpose Application Software)

(i) सामान्य उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software)

सामान्य उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software) का उपयोग कंप्यूटर द्वारा सामान्य कार्य करने के लिए किया जाता है।

सामान्य उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (General Purpose Application Software) निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :-

  • (a) वर्ड प्रोसेसर (Word Processor)
  • (b) प्रस्तुति (Presentation)
  • (c) स्प्रेड शीट (Spread Sheet)
  • (d) डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System)
  • (e) ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software)
  • (f) डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software)
  • (g) मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software)
(a) वर्ड प्रोसेसर (Word Processor)
  • वर्ड प्रोसेसर (Word Processor) का मुख्य उद्देश्य डाक्यूमेंट्स को बनाने, संशोधन, प्रिंट और सेव करने जैसे कामों को करने के लिए होता है।
  • वर्ड प्रोसेसर (Word Processor) आवश्यकता पड़ने पर डाटा के पुन: प्राप्ति और पुनरावृत्ति में भी उपयोगी है। जैसे :- MS Word, Open Office O R Writer, Libre Office Writer, Text Maker आदि।
(b) प्रस्तुति (Presentation)
  • प्रस्तुति (Presentation) का उद्देश्य किसी विषय वस्तु या टॉपिक या विचारों को बनाकर टेबुलर रूप में प्रदर्शित करने का होता है।
  • बिक्री विश्लेषण, विज्ञापन, उत्पाद प्रदर्शन, बजट एलोकेशन आदि डाटा को प्रस्तुति (Presentation) द्वारा प्रस्तुत करना आसान हो जाता है।
  • कुछ प्रस्तुति (Presentation) सॉफ्टवेयर है :- Google Slides, Key Note, Prezi, Slide Dog, Microsoft Power Point, Zoho, Coral Presentations आदि।
(c) स्प्रेड शीट (Spread Sheet)
  • स्प्रेड शीट (Spread Sheet) का उद्देश्य डाटा को Rows और Columns के रूप में लिखना होता हैं। स्प्रेड शीट (Spread Sheet) में Rows और Columns के प्रतिच्छेदन को Cells कहते हैं।
  • Cells का प्रयोग Text संख्या, सूत्र और सभी संक्रियाओं को लिखने के लिए होता है।
  • कुछ स्प्रेड शीट (Spread Sheet) सॉफ्टवेयर हैं :- Microsoft Excel, Google Sheet, Number, Smart Sheet, Libre Office Calc आदि।
(d) डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System)
  • डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System) का उद्देश्य डेटाबेस को छाँटने, संभालने और उपयोग लेन में होता है।
  • डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System) के Database के सूचना के एक अंश को फील्ड कहते हैं।
  • डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System) के Database के एक ही प्रकार के फील्ड का समूह रिकॉर्ड कहलाता है।
  • सामान्य रूप से डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System) रिकॉर्डों का समूह हैं।
  • कुछ डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System) सॉफ्टवेयर हैं :- Sybase, Lotus Approach, MS Excel, Corel Paradox, MySQL, SQL Server, FoxPro, Clipper आदि।
(e) ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software)
  • ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software) का उद्देश्य डिजिटल इमेजेस और चित्रों को बनाना एवं संपादन करने की अनुमति प्रदान करना है।
  • ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software) डाटा को लाइन चार्ट, पाई चार्ट, बार चार्ट आदि बनाकर प्रस्तुति में सहायता प्रदान करता है।
  • ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software) में फाइल फ़ॉर्मेट के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट की सुविधा देता है।
  • कुछ ग्राफ़िक्स सॉफ्टवेयर (Graphics Software) हैं :- Adobe Photoshop, illustrator, In Design, Microsoft Paint आदि।
(f) डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software)
  • डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software) का उद्देश्य यूजर को वर्ड प्रोसेसिंग फीचर्स के पूरे सेट की सुविधा देने के साथ – साथ टेक्स्ट और ग्राफ़िक्स पर भी पूर्ण नियंत्रण प्रदान करना है।
  • वर्तमान में डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software) में Brochure, Newsletters, Flyer का उपयोग प्रत्यक्ष तौर पर किया जा रहा है, जिसमें पब्लिशिंग का कार्य सरल होता है।
  • कुछ डेस्कटॉप पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर (Desktop Publishing Software) हैं :- Adobe FrameMaker, Adobe PageMaker, Adobe InDesign, Corel Ventura, CorelDraw, Microsoft Publisher, PageStream, QuarkXPress आदि।
(g) मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software)
  • मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software) का उद्देश्य टेक्स्ट, ऑडियो, स्थिर चित्र, एनिमेशन वीडियो का प्रदर्शन करना है।
  • वर्तमान में मल्टीमीडिया सॉफ्टवेयर (Multimedia Software) का उपयोग विज्ञापन, मनोरंजन, शिक्षा, औषधि, इंजीनियरिंग एवं वैज्ञानिक अनुसंधानों में किया जाता है।

(ii) विशिष्ट उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Special Purpose Application Software)

विशिष्ट उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Special Purpose Application Software) का उपयोग कंप्यूटर द्वारा विशिष्ट कामों को करने के लिए होता है।

विशिष्ट उपयोगी एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Special Purpose Application Software) निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :-

  • (a) रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software)
  • (b) एच० आर० मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (HR Management Software)
  • (c) बिलिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर (Billing System Software)
  • (d) रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software)
  • (e) एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software)
  • (f) पेरोल सिस्टम (Payroll System)
  • (g) अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System)
  • (h) फर्मवेयर (Firmware)
  • (i) मिडलवेयर (Middleware)
(a) रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software)
  • रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software) के द्वारा होटल, ट्रेन टिकट, रेस्टोरेंट आदि में बुकिंग आसान हो जाती है।
  • रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software) में रियल टाइम अपडेट क्षमताओं के द्वारा हर प्रकार का रिजर्वेशन संभव हो सकता है।
  • रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर (Reservation Software) द्वारा आज रेलवे और एयरलाइन्स के रिजर्वेशन आसानी से किए जाते हैं।
(b) एच० आर० मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (HR Management Software)
  • एच० आर० मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (HR Management Software) का उद्देश्य मानव संसाधन विकास विभाग से सम्बंधित कर्मचारियों की सूचना, हितों, उपस्थिति, सूचना रिकॉर्ड आदि का प्रबंधन किया जाता हैं।
(c) बिलिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर (Billing System Software)
  • बिलिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर (Billing System Software) का उद्देश्य ग्राहकों के भुगतान से सम्बंधित है जिसमें सीधे अकाउंट, भीम एप, डेबिट कार्ड से विभिन्न प्रकार के बिलों का भुगतान किया जाता है।
(d) रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software)
  • रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software) का उपयोग स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड को तैयार करने में किया जाता है।
  • रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software) द्वारा वर्गवार रैंक की गणना करना संभव होता है।
  • कुछ रिपोर्ट कार्ड जेनरेटर सॉफ्टवेयर (Report Card Generator Software) हैं :- Accounting, Payroll, Attendance, Inventory Management आदि।
(e) एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software)
  • एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software) का उद्देश्य लेन – देन को अलग – अलग करना, तीव्र, सुविधाजनक बनाना होता है।
  • एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software) आवश्यकता के अनुसार तैयार किया जा सकता है।
  • कुछ एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software) हैं :- Tally, Busy, Zip Books, QuickBooks, ERP Tools आदि।
(f) पेरोल सिस्टम (Payroll System)
  • पेरोल सिस्टम (Payroll System) का उद्देश्य तीव्र गति से पेरोल आधारित गणना जैसे – काम के घंटों की सुनिश्चितता, मजदूरी की गणना आदि को सरल बनाना है।
  • पेरोल सिस्टम (Payroll System) जेनरल लेजर के साथ जुड़ा रहता है।
  • पेरोल सिस्टम (Payroll System) द्वारा एकाउंटिंग आधारित सूचना सरलता से प्राप्त की जा सकती हैं।
(g) अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System)
  • अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System) का प्रमुख उद्देश्य किसी भी संस्था में उपस्थिति – अनुपस्थिति का लगाना सरल हो जाता है।
  • अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System) कर्मचारियों की कार्य – अवधि की जाँच, उपस्थिति डाटा का प्रबंधन के साथ – साथ कर्मचारियों की प्रोफाइल की भी देखभाल करता है।
  • कुछ अटेंडेंस सिस्टम (Attendance System) सॉफ्टवेयर हैं :- पंचकार्ड सिस्टम, फिंगर प्रिंट सिस्टम आदि।
(h) फर्मवेयर (Firmware)
  • फर्मवेयर (Firmware) एक सॉफ्टवेयर है।
  • फर्मवेयर (Firmware) नॉन वोलाटाइल मेमोरी डिवाइस में स्टोर रहता है जैसे – ROM, EPROM या Flash Memory आदि।
  • फर्मवेयर (Firmware) इच्छित कार्य की पूर्ति, सॉफ्टवेयर की मदद से करता है।
  • फर्मवेयर (Firmware) कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे :- स्कैनर, ऑप्टिकल ड्राइव, ट्रैफिक लाइट, डिजिटल कैमरा, मोबाइल फ़ोन आदि का घटकीय अवयव है।
(i) मिडलवेयर (Middleware)
  • मिडलवेयर (Middleware) एक सॉफ्टवेयर है।
  • मिडलवेयर (Middleware) दो अलग – अलग एप्लीकेशन को जोड़ने का काम करता है।
  • मिडलवेयर (Middleware) एप्लीकेशनों के बीच मध्यस्थता का काम भी करता है।
  • मिडलवेयर (Middleware) की इस प्रक्रिया को Plumbing कहते हैं।
  • मिडलवेयर (Middleware) सामान्य रूप से एक एप्लीकेशन होता है, जो दोनों को जोड़ता है जिसके बीच डाटा का प्रवाह होता है।

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