Number System And Computer Codes (संख्या प्रणाली एवं कंप्यूटर कोड) – 8

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संख्या प्रणाली एवं कंप्यूटर कोड

(Number System And Computer Codes)

  • एक कंप्यूटर बाइनरी संख्या प्रणाली (Binary Number System) को समझता है। 0 और 1 बाइनरी संख्या हैं।
  • बाइनरी संख्या का एक निश्चित मूल्य और निश्चित स्थान होता है।
  • बाइनरी संख्या का आधार :-
    • अंक
    • अंकों का संख्या में स्थान
    • संख्या प्रणाली का आधार
संख्या प्रणाली एवं कंप्यूटर कोड (Number System And Computer Codes)
संख्या प्रणाली एवं कंप्यूटर कोड (Number System And Computer Codes)

संख्या प्रणाली (Number System) के प्रकार

  1. दशमलव (Decimal)
  2. बाइनरी (Binary)
  3. ऑक्टल (Octal)
  4. हेक्साडेसीमल (Hexadecimal)

संख्या प्रणाली एवं कंप्यूटर कोड (Number System And Computer Codes)

दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System)

  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) का उपयोग सामान्य जीवन में दिन – प्रतिदिन होता है।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) में 0 से 9 तक के अंकों का प्रयोग होता है।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) को लिखने का आधार 10 है।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) में प्रत्येक स्थान, 10 के एक विशिष्ट घात को बताता है।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) में प्रत्येक अंक का मूल्य संख्या के सापेक्ष स्थान को प्रदर्शित करता है।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System) के उदाहरण :- 9876 –

= 9 × 1000 + 8 × 100 + 7 × 10 + 6

= 9 × 103 + 8 × 102 + 7 × 101 + 6× 100

= 9000 + 800 + 70 + 6 = 9876

 

बाइनरी संख्या प्रणाली (Binary Number System)

  • Binary Number System को Base-2 System भी कहा जाता है।
  • Binary Number System की आधार संख्या 2 है।
  • Binary Number System दो अंको (डिजिट) का प्रयोग करता है 0 और 1 ।
  • Binary Number System में डिजिट को बिट (Bit) कहते हैं।
  • सभी कंप्यूटर के उपकरण सारी सूचनाओं को सिर्फ 0 या 1 यानि बिट डाटा द्वारा ही समझते हैं और उसके अनुसार ही काम करते हैं।
  • कंप्यूटर की सभी आतंरिक क्रियाएँ एवं परिणाम इन्ही बाइनरी डिजिट में व्यक्त होते हैं।

जैसे :-

एकल बिट में 21 = 2 यानि 0 या 1

दो बिट में 22 = 4 यानि 00, 01, 10 तथा 11

दो बिटों द्वारा बाइनरी संख्या
दशमलव मान बाइनरी मान
0 00
1 01
2 10
3 11
तीन बिटों द्वारा बाइनरी संख्या
दशमलव मान बाइनरी मान
0 000
1 001
2 010
3 011
4 100
5 101
6 110
7 111
चार बिटों द्वारा बाइनरी संख्या
दशमलव मान बाइनरी मान
0 0000
1 0001
2 0010
3 0011
4 0100
5 0101
6 0110
7 0111
8 1000
बाइनरी संख्या (Binary Number) को दशमलव रूप में बदलना
  • सबसे पहले न्यूनतम बिट से शुरू करते हुए उस अंक को 20 से गुणा करते हैं तथा सीधे हाथ से उल्टे हाथ की ओर बढ़ते हुए प्रत्येक अंक के साथ 2 की घात को बढ़ाते हुए लिखते हैं।
  • 2 की विभिन्न घातों के गुणनफल का योग करते है और परिणाम प्राप्त करते हैं।
  • उदाहरण :-10000111

= (10000111)2 = 1 × 27 + 0 × 26 + 0 × 25 + 0 × 24 + 0 × 23 + 1 × 22 + 1 × 21 + 1 × 20

= 1 × 128 + 0 × 64 + 0 × 32 + 0 × 16 + 0 × 8 + 1 × 4 + 1 × 2 + 1 × 1

= 128 + 0 + 0 + 0 + 0 + 4 + 2 + 1

=135

दशमलव रूप को बाइनरी संख्या (Binary Number) में बदलना
  • सबसे पहले दशमलव संख्या को 2 से भाग करते हैं। उसके बाद प्रत्येक अवस्था में भागफल और शेषफल को नोट कर लिया जाता है।
  • यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक भागफल शून्य न आ जाये।
  • प्रथम प्राप्त बिट को Least Significant Bit तथा अंतिम प्राप्त बिट को Most Significant Bit कहते हैं।
  • उदाहरण :- 56

(56)10

Number System and Computer Codes
Decimal to Binary
Number System and Computer Codes Decimal to Binary

अत: (56)10 = (111000)2

 

ऑक्टल संख्या प्रणाली (Octal Number System)

  • Octal Number System का आधार 8 होता है।
  • Octal Number System आठ अंकों यानि 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 का उपयोग करता है।
  • Octal Number, तीन बाइनरी संख्याओं के समूह द्वारा प्रदर्शित होती हैं।
  • Octal Number System में प्रत्येक कॉलम में 8 का घात होता है।

 

Binary, Decimal And Octal Number Systems

Number System 4th Digit 3rd Digit 2nd Digit 1st Digit
Binary 23 22 21 20
Decimal 103 102 101 100
Octal 83 82 81 80

 

ऑक्टल संख्या को दशमलव प्रणाली में बदलना

  • न्यूनतम महत्वपूर्ण अंक (Least Significant Digit) से शुरुआत करें एवं उस अंक को 80 से गुणा करते है।
  • पुन: सीधे हाथ से उल्टे हाथ की तरफ चलते हैं और प्रत्येक अंक के साथ 8 की बढ़ती घात से गुणा करते हैं। जैसे 81, 82
  • आगे अलग – अलग अंकों के गुणनफल को आपस में जोड़ लेते हैं।

दशमलव (Decimal) को ऑक्टल (Octal) में बदलना

  • सबसे पहले दशमलव संख्या को 8 से भाग करते है।
  • भागफल और शेषफल को प्रत्येक बार अलग – अलग लिख लेतें हैं।
  • यह प्रक्रिया तब तक की जाती है, जब तक भागफल शून्य के बराबर न हो जाये और 8 से पुनः भाग देना संभव n हो।
  • सभी शेषफलों को सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंक (Most Significant Digit) या MSD से न्यूनतम महत्वपूर्ण अंक (Least Significant Digit) या LSD के क्रम में लिख लेते हैं।

जैसे :- (9891)10 को बाइनरी रूप में लिखिए।

8 9891 शेषफल
8 1236 3 LSD
8 154 4
8 19 2
8 2 3
  0 2 MSD

अत: (9891)10 = (23243)8

ऑक्टल (Octal) को बाइनरी (Binary) रूप में बदलना

  • ऑक्टल संख्या (Octal Number) को बाइनरी संख्या (Binary Number) में बदलने के लिए ऑक्टल संख्या के प्रत्येक अंक को 3 बिट बाइनरी के अनुरूप बदल दिया जाता है।
  • जैसे :- (2756)8 को बाइनरी के अनुरूप बदलना।
  • संख्या “2” का बाइनरी रूप “010” है।
  • संख्या “7” का बाइनरी रूप “111” है।
  • संख्या “5” का बाइनरी रूप “101” है।
  • संख्या “6” का बाइनरी रूप “110” है।
  • अब प्राप्त मानों को एक साथ लिख दिया जाता है। जैसे : – (2756)8 =(010 111 101 110)2

बाइनरी संख्या (Binary Number) को ऑक्टल (Octal) रूप में बदलना

  • दी गई बाइनरी संख्या में 3 लगातार बाइनरी संख्या का एक समूह दायें से बाएं बनाया जाता है।
  • बाइनरी अंकों के प्रत्येक समूह के अनुसार ऑक्टल संख्या लिखते हैं।
  • फिर इन सिंगल ऑक्टल संख्याओं को एक साथ अंतिम परिणाम के लिए लिख लेते हैं।
  • जैसे :- (1101110)2 को ऑक्टल संख्या को बदलें।
  • (1101110)2 = (1) (101) (110)
  • चूंकि सबसे बाएं के समूह में केवल एक बाइनरी संख्या है। इसलिए इस समूह में दो शून्य “00” जोड़कर लिखा जायेंगा।
  • (1101110)2 = (001) (101) (110) = (1) (5) (6) = (156)8

 

हेक्सादशमलव संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System)

  • हेक्सादशमलव संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System) का कंप्यूटर में बहुत ही ज्यादा उपयोग है।
  • हेक्सादशमलव संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System) का आधार 16 होता है।
  • हेक्सादशमलव संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System) में “0” से “9” तक के अंक, दशमलव प्रणाली की तरह होते हैं।
  • हेक्सादशमलव संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System) में 10 को A, 11 को B, 12 को C, 13 को D, 14 को E तथा 15 को F द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
  • एक हेक्सादशमलव अंक को चार बाइनरी अंकों द्वारा लिखा जाता है। जैसे “1” को “0001” लिखा जाता है।
  • हेक्सादशमलव संख्या (Hexadecimal Number) के बाइनरी प्रतिनिधित्व को बाइनरी कोडेड हेक्सादशमलव संख्या (Binary Coded Hexadecimal Number) कहा जाता है।
Hexadecimal Numbers And Their Binary And Decimal Equivalents
Decimal Number Hexadecimal Number Binary Number
0 0 0000
1 1 0001
2 2 0010
3 3 0011
4 4 0100
5 5 0101
6 6 0110
7 7 0111
8 8 1000
9 9 1001
10 A 1010
11 B 1011
12 C 1100
13 D 1101
14 E 1110
15 F 1111
हेक्सादशमलव संख्या को दशमलव रूप में बदलना (Conversion of Hexadecimal into Decimal)
  • हेक्सादशमलव संख्या (Hexadecimal Number) के प्रत्येक अंक को इसके हेक्सादशमलव भार मूल्य से गुणा करते हैं।
  • सभी गुणनफलों को आपस में जोड़ लेते हैं।
  • जैसे :- “2A5C” को दशमलव संख्या में बदलना।

(2A5C)16 = 2 × 163 + A ×  162 + 5 × 161 + C × 160

= 2 ×  4096 + 10 × 256 + 5 × 16 + 12 ×  1

=8192 + 2560 + 80 + 12

= (10844)10

दशमलव को हेक्सादशमलव रूप में बदलना (Conversion of Decimal into Hexadecimal)
  • दशमलव संख्या को 16 से भाग देने पर शेषफल को लिख लेते हैं।
  • शेषफल के अंक 0 से 9 या A से E तक होंगे।
  • यह प्रक्रिया तब तक होगी जब तक भागफल शून्य के बराबर न आ जाये या 16 से भाग देना संभव न हो।

जैसे :- (45678)10 को हेक्सादशमलव रूप में बदलों।

16 45678 शेषफल
16 2854 E LSD
16 178 6
16 11 2
  0 B MSD
अत: (45678)10 = (B26E)16

 

 

बाइनरी को हेक्सादशमलव में बदलना (Conversion of Binary into Hexadecimal)
  • बाइनरी संख्या को 4 बिट के लगातार संख्या का एक समूह, दायें से बाएं बनाये।
  • अब 4 बिट के समूह को इसके हेक्सादशमलव के मान में बदल लें।
  • जैसे :- (1101011101)2 को हेक्सादशमलव में बदलों।

(1101011101)2 = (11) (0101) (1101) इसके एक समूह में 2 बिट हैं इसलिए दो शून्य “00” लगाकर चार बिट बनाते हैं।

= (0011) (0101) (1101) = (3) (5) (D)

 

= (35D)16

हेक्सादशमलव को बाइनरी रूप में बदलना (Conversion of Hexadecimal into Binary)
  • हेक्सादशमलव संख्या के प्रत्येक अंक को इसके अनुरूप 4 बिट वाली संख्या में लिखते हैं।
  • जैसे :- (AC36)16 को बाइनरी रूप में लिखिए।

(AC36)16 =

A = 1010, C = 1100, 3 = 0011, 6 = 0110

(AC36)16 = (1010110000110110)2

हेक्सादशमलव को ऑक्टल में बदलना (Conversion of Hexadecimal into Octal)
  • सबसे पहले हेक्सादशमलव संख्या को बाइनरी संख्या में बदलें।
  • बाद में बाइनरी संख्या को ऑक्टल संख्या में बदलते हैं।

जैसे:- (BD39)16 को ऑक्टल संख्या में बदलें।

(BD39)16 =

B = 1011, D = 1101, 3 = 0011, 9 = 1001

(BD39)16 = (1011110100111001)2

(1011110100111001)2 = (1 011 110 100 111 001)2 = (001) (011) (110) (100) (111) (001)

= (1) (3) (6) (4) (7) (1)

(BD39)16 = (136471)8

 

ऑक्टल को हेक्सादशमलव में बदलना (Conversion of Octal into Hexadecimal)
  • सबसे पहले ऑक्टल संख्या को बाइनरी में बदलें ।
  • फिर बाइनरी संख्या को हेक्सादशमलव संख्या में बदलें।

जैसे (3456)8 को हेक्सादशमलव में बदलें।

(3456)8 = (011 100 101 110)2

(3456)8 = (011100101110)2 = (0111 0010 1110)2 = (7 2 E)16

(3456)8 =(72E)16

Binary, Decimal, Octal And Hexadecimal Number Systems
Number System 5th Digit 4th Digit 3rd Digit 2nd Digit 1st Digit
Binary 24 23 22 21 20
Decimal 104 103 102 101 100
Octal 84 83 82 81 80
Hexadecimal 164 163 162 161 160

कंप्यूटर कोड (Computer Codes)

एक कंप्यूटर डाटा को 0 एवं 1 के रूप में बदलने के लिए विभिन्न कोडिंग तकनीक का प्रयोग करते हैं।

बाइनरी कोडेड दशमलव (Binary Coded Decimal) – BCD
  • दशमलव संख्या को प्रदर्शित करने के लिए BCD सबसे अधिक सरल बाइनरी कोड है।
  • एक दशमलव संख्या को चार बाइनरी बिट से लिखते हैं। जैसे “5” को “0101 से लिखते हैं।
  • BCD कोड तेज गणना की अनुमति देते हैं।
  • BCD कोड का उपयोग Electronic Calculator, Digital Voltmeter, Electronic Counter, Digital Clock आदि में होता है।

 

अमेरिकन स्टैण्डर्ड कोड फॉर इंफार्मेशन इंटरचेंज (American Standard Code for Information Interchange) – ASCII
  • ASCII एक 7 बिट का कोड होता है, जो अमेरिकन नेशनल स्टैण्डर्ड इंस्टीट्यूट (ANSI) द्वारा तैयार किया गया है।
  • माइक्रोकंप्यूटर 8 बिट का उपयोग करते हैं। बेसिक कोड के लिए 7 बिट का उपयोग होता है। 8वें बिट का प्रयोग पैरिटी के लिए होता है।
  • 7 बिट की सहायता से 128 कैरेक्टर की कोडिंग की जा सकती है। 0 से 127 तक ।
  • ASCII ही Most Common Format है जो टेक्स्ट फाइलों में (कंप्यूटर और इंटरनेट में) उपयोग किया जाता है।
  • ASCII का नया रूप, ASCII-8 है, जो 8 बिट का कोड होता है। जिससे 256 कैरेक्टर बन सकते हैं।
  • ISCII (Indian Standard Code for Information Interchange) 8 बिट का भारतीय कोड है।

 

एक्सटेंडेड बाइनरी कोडेड डेसीमल इंटरचेंज कोड (Extended Binary Coded Decimal Interchange Code) – EBCDIC
  • EBCDIC बड़े कंप्यूटरों के लिए स्टैण्डर्ड कोड है।
  • EBCDIC पैरिटी के बिना 8 बिट का कोड होता है, जिससे 256 कैरेक्टर की कोडिंग हो सकती है।

 

यूनिकोड (Unicode)
  • ASCII कोड अन्य भाषाओँ के कैरेक्टर को सपोर्ट नहीं करता था।
  • Unicode नया कोड सिस्टम था। जो कैरेक्टर (विराम चिन्ह, गणितीय संकेत, तीर के निशान आदि) को व्यक्त कर सकता है।
  • यूनिकोड (Unicode) का अत्यधिक इस्तेमाल ईमेल एवं इन्टरनेट में होता है।
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