इनपुट एवं आउटपुट उपकरण (Input And Output Devices) – 6

Input and Output Devices, Keyboard

Table of Contents

इनपुट एवं आउटपुट उपकरण (Input And Output Devices)

Input And Output Devices

इनपुट उपकरण (Input Devices) :-

  1. Keyboard
  2. Pointing Devices
    • Mouse
    • Track Ball
    • Touch Pad
  3. Hand Held Devices
    • Light Pen
    • Touch Screen
    • Joy Stick
  4. Optical Devices
    • OCR
    • OMR
    • Barcode Readers
    • Scanners
    • MICR
  5. Audio/Visual Devices
    • Microphone
    • Webcam

इनपुट एवं आउटपुट उपकरण (Input And Output Devices)

1. Key Board (कीबोर्ड)

  • Key Board (कीबोर्ड) सबसे प्रमुख इनपुट यूनिट है।
  • कंप्यूटर Key Board (कीबोर्ड) सामान्य कीबोर्ड के समान होता है सिर्फ इसमें कुछ अतिरिक्त बटन होते हैं।
  • Key Board (कीबोर्ड) के प्रयोग से यूजर टाइप कर सकता है, शार्टकट Key का प्रयोग कर सकता है, मेनू तक पहुँच सकता है, गेम खेल सकता है अन्य बहुत से काम कर सकता है।
  • एक Key Board (कीबोर्ड) में 80 से 110 के बीच Keys होती हैं। जैसे :- Alphabet Keys, Digits Key, Special Characters Keys, Functions Key और Control Key आदि होती हैं।
  • कीबोर्ड इनकोर्डर (Keyboard Encoder) :- कीबोर्ड इनकोर्डर के दो प्रमुख कार्य :-
    • (i) दबी हुई Key के बारे में पता करना।
    • (ii) उसी Key के अनुसार बाइनरी कोड को भेजना।
  • सामान्य रूप से स्टैण्डर्ड Keyboard QWERTY रूप में होते हैं।
  • तेज गति से टाइपिंग करने के लिए Keys को खास तरीके से व्यवस्थित करते हैं इसे Dvorak Keyboard कहते हैं।
  • Dvorak Keyboard के Layout का विकास सन् 1930 में Dr. August Dvorak ने किया था।

Keyboard की विभिन्न Keys का संक्षिप विवरण :-

(i) वर्णमाला कुंजी (Alphabet Keys) :-
  • Keyboard में अंग्रेजी वर्णमाला के 26 अक्षर होते हैं।
  • Shift Key या Caps Lock Key दबा होने पर Capital Letters टाइप होते हैं, दबा नहीं होने पर Small Letters टाइप होते हैं।
(ii) अंक कुंजी (Digit Keys) :-
  • Digit Keys में 0 से 9 तक 10 Keys होती हैं।
  • Digit Keys में अंकों को तेजी से टाइप करने के लिए Numeric Keypad लगा होता हैं
(iii )विशेष चिन्ह कुंजी (Special Character Keys) :-

‘ 🡲 ओपेन कोट्स, ! 🡲 एक्सक्लेमेशन मार्क, @ 🡲 एट सिम्बल, # 🡲 हैशटैग, $ 🡲 डॉलर, % 🡲 परसेंट, ^ 🡲 कैरेट, & 🡲 एंड, * 🡲 एक्टेरिक्स, – 🡲 हाइफन, _ 🡲 अंडरस्कोर, ( 🡲 ओपन ब्राइकैट, ) 🡲 क्लोज ब्राइकैट, : 🡲 कॉलन, : 🡲 सेमीकोलन, ” 🡲 डबलकोट, \ 🡲 बैकस्लैश, / 🡲 फॉरवर्ड स्लैश, . 🡲 फुल स्टॉप, | 🡲 वर्टिकल बार, , 🡲 क्वामा आदि।

(iv) फंक्शन कुंजी (Function Keys) :-

F1 से F12 तक की फंक्शन Keys, Keyboard पर प्रथम पंक्ति में लगी होती हैं।

KeysKeys का प्रयोग
F1प्रोग्राम की Help Screen को खोलना
F2फाइल या फोल्डर को एडिट कर नाम बदलना
F3एप्लीकेशन में सर्च फीचरओपेन करना
F4विंडो को बंद करना
F5रिफ्रेश करना
F6इंटरनेट ब्राऊजर के एड्रेस बार पर कर्सर ले जाना
F7स्पेलिंग या ग्रामर चेक करना
F8कंप्यूटर ऑन करते समय बूट मेनू पर जाना
F9आउटलुक ईमेल भेजने और प्राप्त ऑप्शन के लिए
F10एप्लीकेशन का मेनू बार खोलना
F11इंटरनेट के ब्राऊजर को फुल स्क्रीन करने या हटाने के लिए
F12MS Word के Save As के डॉयलॉग बॉक्स खोलने के लिए

कुछ प्रमुख Keys एवं उनका उपयोग :-

KeysKeys का प्रयोग
Enter Keyइसे दबाने पर कर्सर अगली पंक्ति के शुरूआत में आ जाता है
Home Keyइसे दबाने पर कर्सर पंक्ति के प्रारंभ में चला जाता है।
Ctrl + Home Key दबाने पर कर्सर टेक्स्ट के बिलकुल प्रारंभ में आ जाता है।
End Keyइसे दबाने पर कर्सर पंक्ति के अंत में चला जाता है।
Ctrl + End Key दबाने पर कर्सर टेक्स्ट के अंत में आ जाता है।
Page Upइसे दबाने पर पेज को ऊपर आने में मदद करता है।
Page Downइसे दबाने पर पेज को नीचे जाने में मदद करता है।
Arrow Keysये कर्सर को ऊपर, नीचे, लेफ्ट या राईट ले जाने में मदद करती हैं।
Deleted Key (Del)यह टाइप किये हुए डाटा को मिटाता है। कर्सर के Right Side के डाटा को
Backspace Keyयह टाइप किये हुए डाटा को मिटाता है। कर्सर के Left Side के डाटा को
Insert Keyयह किसी भी Input को अन्दर डालता है।
Print KeyWindow-OS वाले कंप्यूटर में इसे दबाने से स्क्रीन कैप्चर हो जाती है।
DOS-OS में प्रिंट निकलता है।
Tab Keyयह कर्सर के बाद वाले टैब स्पॉट पर ले जाता है।
Shift Keyइसे दबाकर अन्य कोई अक्षर दबाने पर Capital Letter टाइप होता है।
Alternate Key (Alt)इसको दबाकर Function Key दबाने पर एक विशेष क्रिया होती है। जैसे Alt+F4 दबाने पर प्रोग्राम बंद हो जाता है।
Ctrl Keyइस Key को अन्य अक्षर या अंक के साथ दबाने पर कोई न कोई नियंत्रण क्रिया होती है। जैसे:-
Ctrl+B :- बोल्ड फॉरमेट
Ctrl+P :- प्रिंट
Ctrl+S :- सेव
Ctrl+U :- अंडरलाइन आदि।

पोइंटिंग उपकरण (Pointing Devices)

  • पोइंटिंग उपकरण (Pointing Devices) Pointer के स्थानांतरण पर नियंत्रण रखने की क्षमता रखते हैं। जैसे – स्क्रीन पर कोई विशेष फाइल को चुनना, कमांड मेनू से कमांड को चुनना, ग्राफ खीचना आदि।
  • कुछ प्रमुख पोइंटिंग उपकरण (Pointing Devices) – माउस, लाइट पेन, लाइट बॉल, जॉयस्टिक, टचपैड आदि।

(i) माउस (Mouse) :-

Input And Output Devices,
Mouse
Input And Output Devices
Mouse

माउस (Mouse) का निर्माण सन् 1963 में डगलस एंजेलबर्ट ने किया था। माउस (Mouse) एक इनपुट डिवाइस है। माउस (Mouse) को Pointing (पोइंटिंग) डिवाइस कहते हैं।

  • माउस में दो बटन होते हैं – (i) बाँया बटन, (ii) दाँया बटन
  • बटनों के बीच में घूमने वाला एक स्क्रॉल होता हैं जो चक्के की तरह काम करता है।

माउस के प्रमुख कार्य:-

  • (i) क्लिक (Click) :- विशिष्ट चीजे चुनने में।
  • (ii) डबल क्लिक (Double Click) :- डॉक्यूमेंट या एप्लीकेशन खोलने में।
  • (iii) राइट क्लिक (Right Click) :- निर्देशों की सूची को स्क्रीन के ऊपर प्रदर्शित करने में।
  • (iv) ड्रेग एंड ड्रॉप (Drag and Drop) :- स्क्रीन पर किसी विशिष्ट चीज या हिस्से को हटाना।
  • (v) स्क्रॉल (Scroll) :- लम्बे डॉक्यूमेंट को सरसरी निगाह से देखने के लिए।

माउस के प्रकार :-

  • मैकनिकल माउस :- मैकनिकल माउस में नीचे एक रबर तथा एक धातु का बॉल होता है जो सेंसर युक्त होते हैं।
  • ऑप्टिकल माउस :- ऑप्टिकल माउस में कैमरा, एल०ई०डी० और एक एम्बेडेड प्रोसेसिंग यूनिट से युक्त होते हैं। ऑप्टिकल माउस के स्थान परिवर्तन को सेंसर टेक्नोलॉजी से पहचानते है।
  • कॉर्डलेस माउस :- कॉर्डलेस माउस रेडियो सिग्नल के द्वारा कंप्यूटर के इंटरकेस से जुड़ता है।

माउस के लाभ :-

  • माउस के द्वारा बहुत जल्दी से कर्सर को कंप्यूटर स्क्रीन पर कही पर भी ले जा सकते हैं।
  • माउस द्वारा दी जाने वाली कमांड को याद करने की जरूरत महसूस नहीं होती है।

(ii) ट्रैकबॉल (Trackball) :-

  • ट्रैकबॉल (Trackball) एक पोइंटिंग डिवाइस है जिसका आविष्कार रॉल्फ़ बेंजामिन ने किया था।
  • ट्रैकबॉल (Trackball) में एक बॉल होती है जो किसी भी दिशा में घूम सकती है।
  • ट्रैकबॉल (Trackball) की बॉल जिस दिशा में घूमती है कर्सर भी उसी दिशा में घूमता है।
  • ट्रैकबॉल (Trackball) को माउस से कम जगह की आवश्यकता होती है।
  • ट्रैकबॉल (Trackball) माउस की ही तरह काम करता है।
  • ट्रैकबॉल (Trackball) का उपयोग कंप्यूटरीकृत विशिष्ट उद्देश्य वर्क स्टेशनों में होता है। जैसे :- रडार कोनसोल (एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल में), सोनार इक्विपमेंट (जहाज या सबमेरिन में)

ट्रैकबॉल (Trackball) के फायदे :-

  • (i) ट्रैकबॉल (Trackball) बेहतर रिजोल्यूशन प्रदान कटा है।
  • (ii) ट्रैकबॉल (Trackball) माउस से कम स्थान घेरता है।

ट्रैकबॉल (Trackball) के नुकसान:-

ट्रैकबॉल (Trackball) के चैम्बर ज्यादातर धुल, गन्दगी से भरे होते है इसलिए रोज सफाई की जरूरत होती है।

(iii) टचपैड (Touchpad) :-

  • आजकल लैपटॉप में टचपैड (Touchpad) पोइंटिंग लगा होता है।
  • टचपैड (Touchpad) को प्रयोग करने के लिए इस पर सिर्फ उँगलियों को फिसलाना होता है।
  • लैपटॉप में टचपैड (Touchpad) के नीचे बटन होते हैं।
  • टचपैड (Touchpad), माउस से कम स्थान घेरता है।
  • टचपैड (Touchpad), ट्रैकबॉल से अच्छा होता है, क्योकिं इसमें गंदे होने की जगह नही होती।

हैण्ड हेल्ड उपकरण (Hand Held Devices)

  • हैण्ड हेल्ड उपकरण (Hand Held Devices) छोटे कंप्यूटिंग उपकरण हैं, जिनमें डिस्प्ले स्क्रीन भी हो सकती है।
  • हैण्ड हेल्ड उपकरण (Hand Held Devices) में टच स्क्रीन इनपुट एवं छोटा कीबोर्ड लगा होता है।
  • हैण्ड हेल्ड उपकरण (Hand Held Devices) के उदाहरण :- जॉयस्टिक, स्मार्टफ़ोन, पी०डी०ए०, स्टाइलस, टच स्क्रीन आदि।

(i) लाइट पेन (Light Pen) :-

  • लाइट पेन (Light Pen) एक कलम की तरह होता है।
  • लाइट पेन (Light Pen) एक इनपुट डिवाइस है, जो प्रकाश संवेदनशील घड़ी की तरह होता है और कंप्यूटर CRT डिस्प्ले के साथ जुड़ा होता है।
  • लाइट पेन (Light Pen) किसी मेनू में से खास चीज को चुनने या स्क्रीन पर चित्र बनाने में प्रयोग होता है।
  • लाइट पेन (Light Pen) में एक फोटोशेल होता है तथा एक छोटे से ट्यूब में ऑप्टिकल सिस्टम दिया होता है।
  • जब लाइट पेन (Light Pen) के छोर को स्क्रीन पर घुमाया जाता है और इसे दबाया जाता है तो फोटोशेल सेंसिंग एलिमेंट, स्क्रीन की स्थिति का पता लगा लेते है और इसके अनुसार सी०पी०यू० को सिग्नल भेजता है।

लाइट पेन (Light Pen) दो प्रकार के होते हैं:-

(i) स्क्रीन पर चित्र बनाने में उपयोगी लाइट पेन (Light Pen)

(ii) सूचना को बार कोड से पढ़ने के सन्दर्भ में उपयोगी लाइट पेन (Light Pen)

(ii) टच स्क्रीन (Touch Screen) :-

  • टच स्क्रीन (Touch Screen) एक इलेक्ट्रॉनिक दृश्य प्रदर्शन (Visual Display) उपकरण होता है, जिससे यूजर साधारण और विशेष कार्य को कण्ट्रोल कर सकता है।
  • टच स्क्रीन (Touch Screen) एक प्रकार का डिस्प्ले स्क्रीन होता है जिसमे Touch Sensitive Transparent पैनल होता है।
  • टच स्क्रीन (Touch Screen) एक पोइंटिंग डिवाइस की तरह काम करता है, जिसे यूजर उँगलियों से अपने अनुसार चलाता है।
  • टच स्क्रीन (Touch Screen) कंप्यूटर को सिग्नल भेजने की प्रणाली पर काम करता है।

(iii) जॉयस्टिक (Joystick) :-

  • जॉयस्टिक (Joystick) कर्सर को नियंत्रित करता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) कंप्यूटर गेम्स, जैसे – CAD (Computer Aided Design), CAM (Computer Aided Manufacturing) आदि में प्रयोग होता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) एक घड़ी की तरह एक आधार के चारों ओर घूमता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) एक माउस की तरह होता है लेकिन अंतर सिर्फ इतना है कि माउस को यदि स्थिर कर दें तो कर्सर भी स्थिर हो जाता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) जैसे घूमता है कर्सर भी उसी दिशा में घूमता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) के पॉइंटर को रोकने के लिए जॉयस्टिक ऊपर की स्थिति में लौटाना पड़ता है।
  • जॉयस्टिक (Joystick) एक लीवर की तरह काम करता है, जो सभी दिशाओं में घूम सकता है।

(iv) ग्राफ़िक्स टेबलेट या डिजिटाइजर (Graphics Tablet or Digitizer) :-

  • ग्राफ़िक्स टेबलेट (Graphics Tablet) एनालॉग सूचना को डिजिटल रूप में बदलता है।
  • ग्राफ़िक्स टेबलेट (Graphics Tablet) में इलेक्ट्रॉनिक लिखा जाता है, जिसमें एक विशेष कलम होती है, कलम से ही काम किया जाता है।
  • ग्राफ़िक्स टेबलेट (Graphics Tablet) में कलाकार, ग्राफ़िक्स चित्र बनाते हैं।
  • ग्राफ़िक्स टेबलेट (Graphics Tablet) ड्राइंग टूल्स की तरह काम करता है।

ऑप्टिकल उपकरण (Optical Devices)

  • ऑप्टिकल उपकरण (Optical Devices), प्रकाश को इनपुट स्त्रोत की तरह उपयोग करते हैं।
  • ऑप्टिकल उपकरण (Optical Devices) प्रकाश के इस्तेमाल से विभिन्न कोड, चिन्ह, अक्षर, चित्र आदि की पहचान करते हैं।
  • ऑप्टिकल उपकरण (Optical Devices) इन चीजों को डिजिटल रूप में बदलता है और इसे कंप्यूटर में आगे प्रोसेसिंग के लिए भेज देता है।
  • कुछ प्रमुख ऑप्टिकल उपकरण (Optical Devices) – OCR, OMR, Barcode Readers, Scanners, MICR आदि।

(i) ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (Optical Character Recognition) – OCR

  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) एक इनपुट डिवाइस है।
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस प्रिंट किये हुए डॉक्यूमेंट को कंप्यूटर में पढ़ने योग्य बनाता है।

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस में निम्नलिखित Steps होते हैं :-

  • टेक्स्ट को ऑप्टिकल तरीके से स्कैन करना।
  • स्कैन किये हुए भाग को हटाकर, कैरेक्टर रूप के चिन्ह को, कैरेक्टर कोड में परिवर्तित करना।
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस, यूजर के टेक्स्ट डॉक्यूमेंट को इमेज फाइल की जगह टेक्स्ट फाइल के रूप में स्टोर करने में मदद करता है।
  • टेक्स्ट फाइल कम स्थान घेरती है तथा इसमें सुधार करना सरल होता है।
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) का प्रयोग :- पैसेंजर टिकट को पढ़ने, माल ढुलाई बिल को एयरलाइन्स द्वारा पढ़ने, मोटरगाड़ी रजिस्ट्रेशन स्लिप के प्रोसेसिंग हेतु, तीव्र गति से पत्रों को छांटने हेतु प्रयोग।

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस के लाभ :-

  • (i) ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस प्रिंट किये हुए डॉक्यूमेंट को टेक्स्ट फाइल में बदल देता है।
  • (ii) आधुनिक ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस हाथ से लिखे हुए टेक्स्ट को भी पढ़ लेता है।

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस के नुकसान :-

  • वर्तमान समय में ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस सभी फॉण्ट को शुद्ध रूप से और पूरी तरह से नहीं पहचान सकता।
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस ख़राब टाइप किये हुए डाक्यूमेंट्स को भी बहुत मुश्किल से पहचान पाता है।
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) डिवाइस बहुत पुराने डाक्यूमेंट्स को भी नहीं पहचान पाता है।

(ii) ऑप्टिकल मार्क रीडर (Optical Mark Reader) – OMR

Input and Output Devices, OMR
Optical mark recognition sheet on scanning machine, OMR Sheet
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) एक प्रक्रिया को दर्शाता है जो इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बने हुए फॉर्म या उत्तर पुस्तिका आदि के चेक बॉक्स से आकंड़ों को ग्रहण करता है।
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) ऑप्टिकल स्कैनर होता है, जिससे पेन या पेंसिल द्वारा चिन्हित भाग की पहचान होती है।
  • जब ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) में “OMR शीट” को डाला जाता है जिसमे पहले से ही चिन्ह किया गया हो। ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) द्वारा स्कैन किया जाता है। अगर किसी खास बॉक्स या स्थान में चिन्हित किया गया है, वहां पर परावर्तित प्रकाश कम पड़ेगा। अगर कोई चिन्ह नहीं है तो अधिक प्रकाश पड़ेगा। इसी प्रकार पता चलता है कि सही विकल्प कितने हैं।
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) का उपयोग वहां पर अधिक होता है, जहाँ पर ज्यादा विकल्पों में से एक को चुनकर चिन्हित करना होता है।
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) का मुख्य उपयोग ऐसी परीक्षाओं में होता है जहाँ पर बहुविकल्पीय प्रश्न होते हैं।

ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) के लाभ :-

  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) काफी तीव्र गति से काम करता है।
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) एक घंटे में 9000 OMR शीट का मूल्यांकन कर सकता है।

ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) के नुकसान :-

  • यदि OMR शीट को मोड़ दिया गए तो ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) डिवाइस इसे निरस्त कर देता है।
  • ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) डिवाइस द्वारा बड़ी मात्रा में सूचनाओं को स्टोर करना संभव नहीं हो पाता।

(iii) बारकोड रीडर (Barcode Reader)

  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) एक हैण्ड हेल्ड इनपुट डिवाइस है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) बारकोड युक्त डाटा को लिखने के काम आता है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) में एक स्कैनर, डीकोडर, रीडर और कंप्यूटर को जोड़ने वाला तार लगा होता है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader), बारकोड चित्र को स्कैन करने के बाद उसे अल्फान्यूमेरिक डाटा में बदलता है।
  • बाद में इसे कंप्यूटर में स्टोर कर लिया जाता है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) का ज्यादातर उपयोग रिटेल व्यापर में होता है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) का प्रयोग वस्तुओं के लैबलिंग को पढ़ने में सुपर मार्केट, मॉल आदि में होता है।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) का उपयोग स्टॉक नियंत्रण में भी होता है।

बारकोड रीडर (Barcode Reader) के लाभ :-

  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) सस्ते होते हैं।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) को कहीं पर भी ले जाना आसान होता हैं।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) का प्रयोग बहुत ही आसान होता है।

बारकोड रीडर (Barcode Reader) के नुकसान :-

  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) का उपयोग बहुत ही सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।
  • बारकोड रीडर (Barcode Reader) पर यदि स्क्रैच आ गया तो यह कोड को पढ़ नहीं पायेगा।

(iv) स्कैनर (Scanner)

Input and Output Devices, Scanner
Scanner
  • स्कैनर (Scanner) एक ऐसी युक्ति होती है जो चित्रों को फोटोग्राफिक प्रिंट, पोस्टर आदि से स्टोर कर इन्हें डिजिटल चित्रों में बदलता है।
  • बाद में इसे अपनी मर्जी के अनुसार बदलकर कंप्यूटर में डिस्प्ले कर सकते हैं।
  • आज कल अच्छी गुणवत्ता के लिए हाई रेजोल्यूशन स्कैनर का प्रयोग होता है।

स्कैनर के प्रकार :-

(a) फ्लेटवेड स्कैनर :-
  • फ्लेटवेड स्कैनर में जिस पृष्ठ को स्कैन करना होता है उसे ग्लास प्लेट के ऊपर में रखकर उसे अपारदर्शी आवरण से ढक दिया जाता है।
  • फ्लेटवेड स्कैनर में सेंसर और प्रकाश पेन साथ साथ घूमता है।
  • फ्लेटवेड स्कैनर ग्लास पट्टी के ऊपर रखी वस्तु की इमेज को परावर्तित कर देता है।
  • यह आवरण अन्य प्रकार के प्रकाश को बीच में आने से रोकता है।
  • फ्लेटवेड स्कैनर का प्रयोग घरों या कार्यालयों में होता हैं।
(b) हेंड हेल्ड स्कैनर :-
Hand Held Scanner, input devices
Hand Held Scanner
  • हेंड हेल्ड स्कैनर से जिस इमेज को स्कैन करना होता है उसके ऊपर हाथ से स्कैनर का प्रयोग होता है।
  • हेंड हेल्ड स्कैनर में हरे LED से प्रकाश उत्पन्न किया जाता है। जो कंप्यूटर पर आगे प्रोसेसिंग हेतु इमेज को हाईलाइट एवं स्कैन करता है।
  • हेंड हेल्ड स्कैनर सामान्य रूप से चार्ज किये हुए कपल डिवाइस (Charge-Coupled Device) -CCD एरे (Array) में उपयोग होता है।
(c) फिल्म स्कैनर :-
Film Scanner, input Device
Film Scanner
  • फिल्म स्कैनर का उपयोग फोटोग्राफी एवं स्लाइड में किया जाता है।
  • फिल्म स्कैनर में स्ट्रिप के अन्दर निगेटिव फिल्म को डाला जाता है, फिर लेंस और सेंसर को साथ – साथ घुमाकर, इमेज को कैप्चर किया जाता है।
(d) ड्रम स्कैनर :-
  • ड्रम स्कैनर एक एक्रिलिक सिलिंडर (Acrylic Cylinder) के ऊपर स्थित होता है।
  • ड्रम स्कैनर अपने घूमने के दौरान इमेज ट्रांसफॉर्मेशन को फोटोमल्टीप्लाइयर ट्यूब्स में भेज देता है।
(e) स्मार्ट कार्ड रीडर :-
Smart Card Reader, Input Device
Smart Card Reader
  • स्मार्ट कार्ड रीडर एक ऐसी डिवाइस है जो स्मार्ट कार्ड के माइक्रोप्रोसेसर तक पहुँच बनाता है।
  • ये कार्ड सामन्यात: प्लास्टिक (पालीविनाइल क्लोराइड – PVC) के बने होते हैं।
  • स्मार्ट कार्ड रीडर मुख्यतः बड़े संगठनों में सुरक्षा और पहचान के उद्देश्य से प्रयोग होते हैं।
(f) बायोमेट्रिक सेंसर :-
Biometric Sensor, Input Device
Biometric Sensor
  • बायोमेट्रिक सेंसर एक ऐसी डिवाइस है जो व्यक्ति की व्यक्तिगत भौतिक लक्षणों को पहचानता है।
  • बायोमेट्रिक सेंसर का उपयोग सुरक्षा कारणों में किया जाता है। जैसे – उपस्थिति काउंटिंग हेतु कार्यालयों एवं संस्थानों आदि में।

मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रीडर (Magnetic Ink Character Recognition) – MICR

Input and Output Devices, MICR
Input and Output Devices
MICR
  • MICR का उपयोग बैंकों द्वारा ज्यादा मात्रा में चेक और डिपोजिट फॉर्म को प्रोसेस करने के लिए होता है।
  • MICR पर एक खास तरह का इंक जो आयरन ऑक्साइड का होता है, जिसे मैग्नेटिक इंक कहते हैं।
  • मैग्नेटिक इंक का प्रयोग कैरेक्टर लिखने में होता है और इसे MICR द्वारा प्रोसेस किया जाता है।
  • MICR लिखे हुए कैरेक्टर मैग्नेटिक पैटर्न को पढ़ लेता है।
  • इनपुट प्रोसेस के समय, मैग्नेटिक इंक मैग्नेटाइज्ड हो जाता है।
  • इन कैरेक्टर का मिलान पैटर्न का, स्टोर मेमोरी में रखे पैटर्न से मिलान किया जाता है।
  • MICR का मुख्य लाभ, MICR का तेज एवं कम अशुद्धि वाला होना है।
  • MICR द्वारा प्रति मिनट 2400 डॉक्यूमेंट को पढ़ा जा सकता है।

ध्वनि/दृश्य उपकरण (Audio/Visual Devices)

  • कंप्यूटर टेक्स्ट को पढ़ने या लिखने के साथ – साथ यूजर को ध्वनि/दृश्य उपकरण (Audio/Visual Devices) के द्वारा गीत सुनने और फिल्म देखने में सहायता करता है।
  • ध्वनि/दृश्य उपकरण (Audio/Visual Devices) आज यूजर के लिए आवश्यक हो गए हैं।

कुछ प्रमुख ध्वनि/दृश्य उपकरण (Audio/Visual Devices) :-

(i) माइक्रोफ़ोन (Microphone) :-

Microphone, Input Device
Microphone
  • माइक्रोफ़ोन (Microphone) को कंप्यूटर से ध्वनि रिकॉर्ड करने हेतु प्रयोग किया जाता है।
  • माइक्रोफ़ोन (Microphone) ध्वनि को डिजिटल तरीके से बदलकर बाइनरी संख्या में परिणाम देता है।
  • इस परिणाम को बाद में प्रोसेस एवं प्लेबैक के लिए स्टोर कर लेता है।

(ii) वेब कैम (Web Cam) :-

Web Cam, Input Device
Web Cam
  • वेब कैम (Web Cam) एक ऐसी डिवाइस है जो कैमरे के रूप में प्रयोग होता है।
  • वेब कैम (Web Cam) ऐसे चित्र उत्पन्न करता है जिससे वर्ल्ड वाइड वेब पर पहुँच बनाई जा सके और सर्वर पर डिस्प्ले हो सके।
  • वेब कैम (Web Cam) ज्यादातर USB द्वारा कंप्यूटर या कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जो विडियो को कैद करते हैं।
  • कुछ वेब कैम (Web Cam) 30 सेकेंडके अन्तराल पर स्थिर इमेज लेते हैं और बाकी 30 सेकेंड के बाद स्ट्रीमिंग विडियो कैद करते हैं।
  • वेब कैम (Web Cam) का अधिकतर सुरक्षा उद्देश्यों एवं विडियो कॉन्फ्रेंशिंग के लिए उपयोग होता है।

आउटपुट उपकरण (Output Devices)

  • आउटपुट उपकरण (Output Devices) ऐसे डिवाइसेस हैं जो आँकड़ों को डिस्प्ले करने में प्रयोग किये जाते हैं।
  • जो हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी के रूप में प्रयोग किये जाते हैं आउटपुट उपकरण (Output Devices) कहलाते हैं।
  • आउटपुट उपकरण (Output Devices) का सिर्फ एक उद्देश्य होता है इलेक्ट्रॉनिक डाटा को मानव के पढ़ने योग्य डिस्प्ले करना।

1. सॉफ्ट कॉपी उपकरण (Soft Copy Devices) :-

सॉफ्ट कॉपी उपकरण (Soft Copy Devices) आउटपुट का इलेक्ट्रॉनिक रूप बनाती है।

सॉफ्ट कॉपी उपकरण (Soft Copy Devices) के प्रकार :-

मॉनिटर (Monitor) :-

  • सामान्यत: VDU (Visual Display Unit) को मॉनिटर या स्क्रीन कहा जाता है।
  • मॉनिटर (Monitor) एक आउटपुट डिवाइस है जिसका उपयोग सूचना को डिस्प्ले करने के लिए किया जाता है।
  • मॉनिटर (Monitor) में सन्देश एवं प्रोसेस की गई सूचना को भी स्क्रीन पर डिस्प्ले किया जा सकता है।
  • जब कीबोर्ड और VDU को आपस में जोड़ा जाता है तो यह विडियो डिस्प्ले टर्मिनल (VDT) कहलाता है। जो इनपुट/आउटपुट रूप में काम करता है।

मॉनिटर का वर्गीकरण (Classification of Monitor) :-

(i) रंग और क्षमता के आधार पर मॉनिटर :-
  • मोनोक्रोम मॉनिटर दो प्रकार के रंग प्रदर्शित करते हैं। एक रंग बैकग्राउंड के लिए तथा दूसरा फ़ोरग्राउंड के लिए। मोनोक्रोम मॉनिटर में रंगों के विकल्प Black & White, Green & Black हो सकते हैं।
  • ग्रे-स्केल मोनोक्रोम एक विशिष्ट प्रकार का मोनोक्रोम होता है जो ग्रे रंग के विभिन्न शेड को प्रदर्शित करने में सक्षम होता है।
  • कलर मॉनिटर 16 से 1 मिलियन तक विभिन्न प्रकार के रंगों को प्रदर्शित करने की क्षमता होती है। कलर मॉनिटर को RGB मॉनिटर भी कहते हैं। क्योकि यह तीन प्राथमिक सिग्नल लेता है, जैसे लाल (Red), हरा (Green) एवं नीला (Blue)
(ii) संप्रेषण तकनीक के आधार पर मॉनिटर :-
(a) कैथोड रे ट्यूब (Cathode Ray Tube) – CRT Monitor :-
CRT Monitor, Output Device
CRT Monitor
  • CRT Monitor, TV स्क्रीन के ही समान होता है।
  • CRT Monitor, एक वैक्यूम टूयूब होता है।
  • CRT Monitor, आवेशित इलेक्ट्रॉन को फॉस्फोरस फिल्म के ऊपर प्रक्षेपित का काम करता है।
  • जब इलेक्ट्रॉन, फॉस्फोरस से कवर पृष्ठ वाले स्क्रीन को छूता है तो प्रदिप्ति उत्पन्न होती है, जिससे यूजर आउटपुट देख पाता है।
  • CRT Monitor में कलर डिस्प्ले उत्पन्न करने हेतु तीन प्रकार के फॉस्फोरस का उपयोग किया जाता है – लाल, हरा एवं नीला।

CRT Monitor के लाभ :-

  • CRT Monitor में दृश्य को खास कोण से देखने पर स्पष्ट दिखाता है।
  • CRT Monitor, LCD एवं प्लाज्मा मॉनिटर से काफी सस्ते होते हैं।
  • CRT Monitor काफी उच्च गुणवत्ता के दृश्य प्रदर्शित करते हैं।

CRT Monitor के नुकसान :-

  • CRT Monitor बड़े आकार के होते हैं एवं ज्यादा जगह घेरते हैं।
  • CRT Monitor बिजली अधिक उपयोग करते हैं।
(b) लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (Liquid Crystal Display) – LCD Monitor :-
LCD Monitor, Output Device
LCD Monitor
  • LCD Monitor एक इलेक्ट्रिक तरीके से बनाया गया ऑप्टिकल डिवाइस है।
  • LCD Monitor एक पतले, चपटे पैनल के आकार का होता है तथा मोनोक्रोम पिक्सेल में लिक्विड क्रिस्टल से भरा होता है।
  • LCD Monitor पतला, चपता इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले यूनिट होता है।
  • वर्तमान में अधिकतर डेस्कटॉप मॉनिटर, LCD टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। जैसे – LCD Monitor, Laptop आदि।

LCD Monitor के लाभ :-

  • LCD Monitor काफी कॉम्पैक्ट होते हैं।
  • LCD Monitor हल्के होते हैं।
  • LCD Monitor ज्यादा विश्वसनीय एवं आँखों के लिए सरल होते हैं।
  • LCD Monitor, CRT Monitor से कम बिजली खर्च करते हैं।

LCD Monitor के नुकसान :-

  • LCD Monitor , CRT Monitor से महंगे होते हैं।
(c) थिन फिल्म ट्रांजिस्टर (Thin Film Transistor) – TFT Monitor :-
TFT Monitor, Output Device
TFT Monitor
  • TFT Monitor एक्टिव मैट्रिक्स टेक्नोलॉजी पर काम करता है।
  • TFT Monitor में प्रत्येक पिक्सेल का नियंत्रण, एक से चार ट्रांजिस्टर द्वारा होता हैं।
  • TFT Monitor स्क्रीन को बहुत तीव्र, ज्यादा चमकदार एवं ज्यादा रंगीन बनाते हैं।
  • TFT Monitor में विभिन्न कोणों से दृश्य दिखाने की क्षमता होती है।
(d) लाइट इमिटिंग डायोड (Light Emitting Diode) – LED Monitor :-
  • LED Monitor में जब तक विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है तब तक प्रकाश उत्पन्न होता रहता है।
  • आजकल LED Monitor, RGB प्रकाश के साथ – साथ सफ़ेद रोशनी भी उत्पन्न करते हैं।
(e) प्लाज्मा मॉनिटर :-
  • प्लाज्मा मॉनिटर में आयोनाइज्ड गैस को दो ग्लास प्लेट के बीच में सेट कर दिया जाता है।
  • प्लाज्मा मॉनिटर, LCD से ज्यादा चमकीला होता है।
  • प्लाज्मा मॉनिटर को 600 के दायरे से कहीं से भी देखा जा सकता है।
  • प्लाज्मा मॉनिटर रंगीन डिस्प्ले के लिए लाल, हरा एवं नीला फॉस्फोरस का इस्तेमाल करता है।

प्रोजेक्टर (Projectors) :-

Projector, Output Device
Projector
  • प्रोजेक्टर (Projectors) एक Output Device है, जो विडियो स्रोत से इमेज लेकर उसे बड़ी स्क्रीन या पर्दे पर डिस्प्ले करता है।
  • बड़े पर्दे पर इमेज डिस्प्ले होने के कारण प्रोजेक्टर (Projectors) का उपयोग लोगों के समूह को दिखाने के लिए होता है।
  • प्रोजेक्टर (Projectors) का उपयोग सिनेमाघर में, क्लास रूम टीचिंग आदि में किया जाता है।

प्रोजेक्टर (Projectors) के प्रकार :-

(a) LCD Projector:-

  • LCD Projector अपने खुद की रोशनी को इमेज डिस्प्ले हेतु कामों में लाता है।
  • LCD Projector, LCD टेक्नोलॉजी पर आधारित है।
  • LCD Projector से इमेज स्पष्ट पाने के लिए कमरे में अँधेरा होना चाहिए।

(b) DLP Projector :-

  • DLP Projector में एक से ज्यादा दर्पण का उपयोग होता है, जिनकी मदद से प्रकाश का परावर्तन किया जाता है।
  • DLP Projector, वीडियो इमेज के सन्दर्भ में काफी मात्रा में उपयोग में आता है।
  • DLP Projector के लिए कमरे में अँधेरा होने की आवश्यकता नहीं हैं।

स्पीकर (Speakers) :-

Speakers
Speakers
  • कंप्यूटर ध्वनि आउटपुट भी उत्पन्न करता है, जो यूजर को Single Beep से सावधान करने के लिए एवं मनोरंजन के लिए गाने सुनने के लिए ।
  • ध्वनि उत्पन्न करने हेतु मदरबोर्ड में PC में ध्वनि कार्ड लगा होता है।
  • किसी भी सिस्टम में स्पीकर (Speakers) एक कॉम्पोनेन्ट होता है। इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के रूप में ध्वनि CD, टेप, DVD आदि में स्टोर होती है और जब हम सुनना चाहते है तो स्पीकर (Speakers) द्वारा मूल रूप में हमें वापस सुनाई देने लगती है।

2. हार्ड कॉपी उपकरण (Hard Copy Devices) :-

  • हार्ड कॉपी उपकरण (Hard Copy Devices) आउटपुट का भौतिक रूप प्रदान करती है।
  • हार्ड कॉपी उपकरण (Hard Copy Devices) से प्राप्त हार्ड कॉपी को वे लोग भी उपयोग कर सकते हैं जिनके पास कंप्यूटर नहीं है।

प्रिंटर (Printer) :-

  • प्रिंटर (Printer) प्राथमिक आउटपुट डिवाइस है। जो सॉफ्ट कॉपी हार्ड कॉपी बनाते है। यानि स्थाई डॉक्यूमेंट बनाते हैं।
  • प्रिंटर (Printer), कंप्यूटर पर किये गए काम को कागज पर हूबहू उतार देता है।

इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) :-

  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) कैरेक्टर एवं ग्राफ़िक्स को कागज पर उतारता है जिसमें इंक रिबन, भौतिक रूप से कागज को छूता है।
  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) बहुत तरह से फॉर्म बनाने में उपयोगी होता है।

इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) के लाभ :-

  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) सस्ते होते हैं।
  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) यूजर को कार्बन कॉपी तैयार करने में मदद करता है।

इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) के नुकसान :-

  • स्ट्राइकिंग एक्टिविटी के कारण इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) काफी ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
  • इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers) मंद गति के प्रिंटर होते हैं।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) :-

Dot Matrix Printer, Output Device
Dot Matrix Printer
  • डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) बड़ी मात्रा में प्रयोग में आने वाला मंद गति का प्रिंटर है।
  • डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) में लघुइलेक्ट्रोमैग्नेटिक पिन का प्रिंट के अग्र भाग में प्रयोग होता है।
  • इसके अलावा इंक वाले रिबन का भी इम्पैक्ट द्वारा इमेज प्राप्त करने के लिए प्रयोग होता है।
  • डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer) से शोर उत्पन्न होता है। अब PC में इसका प्रयोग नहीं होता।

डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) :-

Daisy Wheel Printer, Output Device
Daisy Wheel Printer
  • डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) उच्च गुणवत्ता के प्रिंट निकालने के लिए इम्पैक्ट प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग करता है।
  • डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) में प्रिंट का अग्र भाग, एक व्हील पर होता है।
  • इसके पिन कैरेक्टर के अनुसार, फूल की पंखुड़ियों की तरह रहते हैं, जिसके कारण इसे डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) कहते हैं।

लाइन प्रिंटर (Line Printer) :-

Line Printer, Output Printer
Line Printer
  • लाइन प्रिंटर (Line Printer) एक बार में सिर्फ एक पंक्ति प्रिंट करता है।
  • लाइन प्रिंटर (Line Printer) एक तीव्र गति का प्रिंटर होता है।
  • लाइन प्रिंटर (Line Printer) की गति 600 से 1200 पंक्ति प्रति मिनट या 10-20 पन्ने प्रति मिनट होती है।
  • लाइन प्रिंटर (Line Printer) की उच्च गति के कारण डाटा केन्द्रों एवं औद्योगिक संस्थाओं में उपयोग होता है।

ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) :-

Drum Printer, Output Device
Drum Printer
  • यह प्रिंटर एक ड्रम की तरह होता है इसलिए इसे ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) कहते हैं।
  • ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) का धरातल विभिन्न पथों में होता है। इसमें कुल पथों की संख्या एक पन्ने के आकार की होती है।
  • 132 चिन्ह/संकेत/अक्षर की चौड़ाई के बराबर में ड्रम में 132 पथ होते हैं।
  • ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) की एक आवृत्ति एक पंक्ति को प्रिंट करती है।
  • ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) तीव्र गति के प्रिंटर होते हैं।

नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) :-

  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) संकेत/चिन्ह/चित्र/आलेख आदि को किसी पन्ने के ऊपर बिना उसे छुए प्रिंट कर देता है। इसीलिए इसे नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) कहते हैं।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) ताप एवं दबाव का उपयोग करके आकृति को प्रिंट करते हैं।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) कागज को नहीं छूता, इसलिए यह शोर नहीं करता।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) के उदाहरण – इंकजेट प्रिंटर, लेजर प्रिंटर, थर्मल प्रिंटर आदि।

नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) के लाभ :-

  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) उच्च गुणवत्ता वाले प्रिंट का निर्माण करते हैं।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) तीव्र गति वाले एवं शोरविहीन होते हैं।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) विभिन्न प्रकार के Font वाले अक्षरों को प्रिंट कर सकते हैं।

नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) के नुकसान :-

  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) खर्चीले होते हैं।
  • नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) के Ink कार्ट्रिज भी काफी महंगे होते हैं।

थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) :-

Thermal Printer, Output Device
Thermal Printer
  • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर होते है, जो विशेष प्रकार के कागज जिस पर रसायन लेपित होता है, पर प्रिंट करता है।
  • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) रसायन के ताप के साथ प्रतिक्रिया पर आधारित होता है।
  • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) में किसी तरह का फीता या इंक प्रयोग में नहीं लाया जाता।
  • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) सामान्यत: फैक्स तथा ATM मशीन पर रसीद उत्पन्न करते हैं, जो थर्मल प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित होता है।
  • थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) का उपयोग – राशन सामग्री, सुपरमार्केट, डिपार्टमेंटल स्टोर आदि पर होता है।

इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) :-

Inkjet Printer, Output Device
Inkjet Printer
  • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर होते है।
  • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) का प्रयोग घर एवं कार्यालयों में किया जाता है।
  • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) में कलर प्रिंट करने के लिए कई तरह के रंग जैसे – Cyan, Yellow, Magenta, Black आदि की जरूरत पड़ती हैं।
  • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) कम खर्चीले होते हैं। प्रिंटिंग सामग्री के खर्चों के कारण ये महंगे लगते हैं।
  • इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) अक्षरों एवं आकृतियों दोनों को प्रिंट कर सकता है।

लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) :-

Laser Printer, Output Device
Laser Printer
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर होते हैं।
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नियंत्रित लेसर बीम, घूमती हुई फोटो कंडक्टिवड्रम पर इलेक्ट्रोस्टैटिक इमेज बना देता है।
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) में इंक टोनर, इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्जड आकृति का निर्माण ड्रम के ऊपरी सतह पर कर देता है।
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) अत्यंत तीव्र गति का होता है।
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) 146 पन्ने प्रति मिनट एवं 400-1200 डॉट प्रति इंच, रेजोल्यूशन से प्रिंट करता है।
  • लेज़र प्रिंटर (Laser Printer) इंकजेट प्रिंटर से महंगे होते हैं, लेकिन अंत में ये सस्ते पड़ते हैं।

इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिंटर (Electrostatic Printer) :-

  • इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिंटर (Electrostatic Printer) तीव्र गति वाले सस्ते प्रिंटर होते हैं।
  • इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिंटर (Electrostatic Printer) प्रिंटिंग दुकानों में पाए जाते हैं जो बड़े पोस्टरों को छापते हैं।

प्लॉटर्स (Plotters) :-

Plotters, Output Device
Plotters
  • प्लॉटर्स (Plotters) एक प्रकार का प्रिंटर है जो वेक्टर ग्राफिक्स को छापता है।

प्लॉटर्स (Plotters) दो प्रकार के होते हैं :-

(a) फ्लैट बेड प्लॉटर्स :-

  • फ्लैट बेड प्लॉटर्स क्षैतिज सपाट सतह का उपयोग करते हैं।
  • फ्लैट बेड प्लॉटर्स में कागज नहीं घूमता है बल्कि प्लॉटिंग की प्रक्रिया में एक घुमावदार पेन कागज के ऊपर घूमता है।
  • यह दोनों धुरों के साथ घूमता हैं।
  • फ्लैट बेड प्लॉटर्स कम खर्चीले होते है तथा छोटे कंप्यूटिंग सिस्टम में उपयोग होते हैं।

(b) ड्रम प्लॉटर्स :-

  • ड्रम प्लॉटर्स का उपयोग, ड्रम के चारों ओर लिपटे हुए कागज पर आरेख खीचने के लिए होता हैं।
  • ड्रम प्लॉटर्स का उपयोग मेनफ्रेम एवं मिनीफ्रेम सिस्टमों में होता है।

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